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यूपी: हथगाम में गुरु अर्जन देव की तपोस्थली न बन सकी तीर्थस्थली, पांचवें सिख गुरु का था पड़ाव, कभी रहती थी चहल-पहल अब सन्नाटा

Thu, 11 Nov 2021 01:34 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर

सार

गुरु अर्जन देव का जन्म 15 अप्रैल 1563 को हुआ था। 18 वर्ष की आयु में ही पिता ने उन्हें गुरु गद्दी पर विराजमान कर दिया था। उन्हें शहीदों का सरताज शांतिपुंज कहा जाता है।
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हथगाम में सिख गुरु अर्जन देव की तपोस्थली - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बहुत कम लोग लोग जानते होंगे कि कानपुर से करीब 140 किलोमीटर दूर फतेहपुर जिले के कस्बे हथगाम (हथगांव) में सिखों के पांचवें गुरु अर्जन देव की तपोस्थली है। वहां हस्तलिखित गुरुग्रंथ और उनके शंख अभी भी सुरक्षित है। सैकड़ों बीघे में फैले इस स्थान में गुरुद्वारा, सरोवर और बगीचे बनाकर इसे तीर्थस्थल बनाने की कोशिश की गई, लेकिन सहमति नहीं बनने से काम पूरा न हो सका।
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फतेहपुर मुख्यालय से लगभग 55 किलोमीटर दूर खागा होते हुए आगे मिलता है हथगाम, जहां सिखों के पांचवें गुरु अर्जन देव की तपोस्थली है। कई साल तक तक पूरे देश के सिख अपने इन गुरु जी की जयंती और शहादत दिवस पर यहां आते, संगत होती, लंगर चलते और शबद-कीर्तन गूंजता रहता था।

खास बात यह कि लाहौर (पाकिस्तान) में गुरु अर्जन देव के शहादत स्थल पर श्रद्धालु उमड़ते हैं, भारत से भी लोग जाते हैं, लेकिन यहां हथगाम के इस पवित्र स्थल पर सन्नाटा रहता है। सैकड़ों बीघे में फैले इस स्थान पर गुरु नानक जी के नाम पर शिशु मंदिर और इंटर कालेज है।
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इसी परिसर में गुरु अर्जन देव के शिष्यों की चार समाधियां हैं  जिन्हें पक्का करवा दिया गया। पांच सौ साल बीत गए पर उस वक्त की मजबूत दीवारों के अवशेष अभी भी मौजूद हैं। सामने कई बीघे का तालाब है। एक प्राचीन कुआं है। उस काल का पवित्र गुरुग्रंथ भी है, जिसे गुरु अर्जन देव और अन्य का लिखा बताया जाता है।

बाल कल्याण समिति गुरु के पड़ाव और स्कूल-कालेज का संचालन करती है। कई साल पहले तक यहां पंजाब, कानपुर और अन्य जगहों से सिख संस्थाओं के पदाधिकारी, ग्रंथी आते रहते थे। अब पड़ाव में न तो गुरु जी का चित्र है न ही कोई निशानी। कहीं संकेतक भी नहीं। कोई गुरुद्वारा तक नहीं बना। गुरु जी की पहचान को पुख्ता करने के कोई प्रयास नहीं किए गए।

समिति से जुड़े लोगों का कहना है कि गुरु अर्जन देव जी की इस तपोस्थली के दायरे में सैकड़ों बीघा जमीन थी, पर कुछ साल पहले अपने को उत्तराधिकारी बताने वाले ने बड़े पैमाने पर जमीनें बेच दी। अभी भी कई बीघे जमीन समिति के पास है, जिस पर स्कूल-कालेज चल रहा है।

कई बीघा जमीन खाली पड़ी है। खास बात यह है कि समिति में एक भी सिख नहीं है। हथगाम में भी सिख नहीं दिखते। धरोहर, पवित्र गुरुग्रंथ और शंख कई साल तक पुलिस की निगरानी में रहे। भोजपत्र पर काली स्याही से पवित्र गुरुग्रंथ (1302 पेज) इसी स्थान (पड़ाव) में रखा था।

इसकी लिखावट गुरु अर्जन देव और उस काल के अन्य लोगों की बताई जाती है। कुछ साल पहले समिति के प्रबंधक अमर नाथ चौरसिया इसे अपने घर उठा ले गए। उनका कहना है कि पड़ाव में यह धरोहर सुरक्षित नहीं। कई ग्रंथियों ने पुष्टि की कि इसमें गुरुवाणी ही है। गुरु जी का बड़े आकार का शंख भी सुरक्षित है।

गुरु अर्जन देव की महिमा
गुरु अर्जन देव का जन्म 15 अप्रैल 1563 को हुआ था। 18 वर्ष की आयु में ही पिता ने उन्हें गुरु गद्दी पर विराजमान कर दिया था। उन्हें शहीदों का सरताज शांतिपुंज कहा जाता है। गणना की दृष्टि से गुरुग्रंथ साहिब में सर्वाधिक वाणी पंचम गुरु की है। रागों के आधार पर है। जहांगीर को उनकी लोकप्रियता और धर्मपरायणता अच्छी नहीं लगी। उसने उन्हें यातनाएं दीं पर वह विचलित नहीं हुए और 16 जून 1606 को लाहौर में शहीद हो गए।
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गुरुद्वारे का प्रस्ताव
गुरु अर्जन देव जी प्रयाग से आते-जाते इस गांव में कई दिन तक ठहरते थे। उनके इस पड़ाव को सिखों ने गुरुगद्दी माना। एक बार पंजाब से आए एक सिख संगठन के लोगों ने यहां निशान साहिब लगा दिया था। गुरुद्वारा बनाने और तालाब को सरोवर बनाने की बात कही थी। पर समिति से उनकी सहमति नहीं बनी।- कृष्ण पाल शर्मा, प्रधानाचार्य गुरु नानक इंटर कॉलेज

हथगाम में गुरुजी की तपोस्थली के बारे में सुना है, लेकिन वहां कभी जाने का सौभाग्य नहीं मिल सका। गुरुग्रंथ में गुरुवाणी ही है। गुरु सिंह सभा के साथ वहां जाऊंगा। वहां की समिति और क्षेत्रीय लोगों से बात करूंगा। फिर तय करूंगा कि वहां क्या हो सकता है।- हरविंदर सिंह लार्ड, अध्यक्ष गुरु सिंह सभा लाटूश रोड

मैं फतेहपुर तो कई बार गया, लेकिन इस पवित्र स्थान के दर्शन करने का सौभाग्य नहीं मिल सका। इसके बारे में जानकारी भी सिखों को नहीं है। अब जिज्ञासा बहुत बढ़ी है, शीघ्र ही वहां जाउंगा। इसके बाद प्लान करूंगा कि वहां क्या किया जाए। - कुलदीप सिंह, चेयरमैन गुरु सिंह सभा, कानपुर                               
                                                                                                                                                                                                                                                                                प्रस्तुति- शैलेश अवस्थी
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