बिना बताए सहेली के घर चली गई थी किशोरी
विशेष लोक अभियोजक भावना गुप्ता ने बताया कि अभियोजन की ओर से पीडि़ता व उसकी मां समेत पांच गवाह कोर्ट में पेश किए गए। कोर्ट में दिए बयान में पीडि़ता ने कहा था कि उसके पिता की मौत हो चुकी थी। मां उसे मारती-पीटती थी इसलिए वह बिना बताए सहेली के घर चली गई थी। जब गुस्सा शांत हुआ तो वापस लौट आई थी। सूरज ने उसे नहीं भगाया और न ही उससे शारीरिक संबंध बनाए।
दुष्कर्म के सबूत नहीं मिले, लेकिन इसलिए मिली सजा
उसने अपना मेडिकल कराने से भी इनकार कर दिया था। वहीं पीडि़ता की मां ने भी बयान में कहा कि उसने मोहल्लेवालों के कहने पर सूरज का नाम लिखवा दिया था। दोनों गवाह पक्षद्रोही हो गए, लेकिन पुलिस ने चार माह बाद किशोरी को सूरज के साथ पकड़ा था। अभियुक्त के खिलाफ दुष्कर्म के सबूत नहीं मिले इसलिए दुष्कर्म के आरोप से तो बरी कर दिया, लेकिन गवाहों के पक्षद्रोही होने के बावजूद कोर्ट ने दोषी मानकर सजा सुनाई।