बांदा। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को बांदा जेल के गेट पर चाबी के इंतजार में खड़ा नहीं रहना पड़ेगा। जेल के मुख्य गेट से सर्किल तक के तीनों दरवाजों की एक-एक चाबी जिला प्रशासन के पास रहेगी। अब किसी भी समय प्रशासनिक अफसर जेल पहुंचकर वहां की गतिविधियों का संज्ञान ले सकेंगे। सीएम के आदेश पर यह निर्णय जेल प्रशासन ने लिया है। जेल के प्रमुख दरवाजों की चाबी डीआईजी (जेल) संजीव त्रिपाठी जिलाधिकारी को सौंपेंगे।
रविवार की आधी रात जेल में चेकिंग करने गए डीएम अनुराग पटेल व पुलिस अधीक्षक अभिनंदन को चाबी नहीं मिलने का बहाना बनाकर करीब एक घंटे तक बाहर खड़ा रखा गया। बाद में अंदर जाने पर डीएम, एसपी को कई अनियमितताएं मिलीं। यहां तक मुख्तार को जेल मैनुअल के विपरीत घर जैसी वीआईपी सुविधाएं दी जा रही थीं।
अब सीएम के आदेश पर जेल के मुख्य गेट से लेकर सर्किल तक के तीन दरवाजों की एक-एक चाबी प्रशासन को दी जाएगी। प्रशासनिक अफसर किसी भी समय जेल जाकर वहां की गतिविधियों को देख सकेंगे। चाबी डीआईजी (जेल) संजीव त्रिपाठी जिलाधिकारी को सौंपेंगे। डीआईजी (जेल) ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर इसकी जानकारी दी है।
सात पेज की सीएम को भेज रिपोर्ट
बांदा। डीएम ने जेल के निरीक्षण के दौरान मिली अनियमितताओं से संबंधित सात पेज की रिपोर्ट मुख्यमंत्री को भेजी है। अब तक मुख्तार की खातिरदारी में लगे डिप्टी जेलर वीरेश्वर प्रताप समेत 10 बंदी रक्षकों पर कार्रवाई हो चुकी है।
सूत्र बताते हैं कि आने वाले दिनों में जेल के कई बड़े अफसरों पर भी गाज गिर सकती है। उधर, डीआईजी जेल संजीव त्रिपाठी भी शासन को अपनी रिपोर्ट भेजने के लिए जांच में जुटे हैं। अब तक उन्होंने मुख्तार की सुरक्षा में लगे दो डिप्टी जेलर व 10 बंदी रक्षकों सहित 30 बंदियों के बयान दर्ज किए हैं। हालांकि डीआईजी जेल इस बात से पल्ला झाड़ रहे हैं कि जेल में मुख्तार को जेल नियमों के विरुद्ध सुविधाएं दी जा रही हैं।
सुरक्षा में नहीं रहेंगे जाति विशेष के सुरक्षाकर्मी
जेल में मुख्तार को घर जैसी सुविधा उपलब्ध कराने में दो जाति विशेष के लोगों का अहम हाथ बताया जा रहा है। डीएम ने कारागार अधीक्षक को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मुख्तार की सुरक्षा में दो जाति विशेष के सुरक्षा कर्मियों की कतई ड्यूटी न लगाई जाए। सीसी कैमरे हर समय क्रियाशील रहें। निरीक्षण में सीसी कैमरा बंद मिला तो कठोर कार्रवाई की जाएगी।
आम बंदियों की तरह होगी मुख्तार की मुलाकात
अभी तक मुख्तार परिजनों से मुलाकात जेल अधीक्षक अथवा डिप्टी जेलर के कक्ष में करते थे। जब कि आम बंदी जेल के दूसरे गेट के बाद बने लॉन में करते हैं। शासन के निर्देश पर कारागार अधीक्षक को निर्देश दिए हैं कि मुख्तार की मुलाकात आम बंदियों की तरह जेल मैनुअल के तहत कराई जाए।