गांव की 14 साल की बेटी की मौत और भर्ती में सुस्ती ने ग्रामीणों में रोष भर दिया है। नर्सिंगहोमों के डॉक्टर भी कुरसौली में फैले बुखार को नहीं समझ पा रहे। रोगियों का लक्षण के आधार पर इलाज किया जा रहा है। प्रदेश के नंबर वन राजकीय मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था पर यह सवालिया निशान है।
कुरसौली में अब तक आठ मौत हो चुकी हैं और ढाई सौ बुखार के रोगी मिले हैं। सभी का इलाज कल्याणपुर, नौबस्ता, किदवईनगर आदि क्षेत्रों के नर्सिंगहोमों में हुआ है और चल रहा है। कुरसौली के ग्राम प्रधान अमित सिंह का कहना है कि तन्नू को ले जाने में एक घंटा लगा और चार घंटे इंतजार कराया गया।
वहां कौन जाए? गांव के ज्वाला प्रसाद और संजय कुमार का कहना है कि लोग कर्जा लेकर इलाज करा रहे हैं। हैलट नहीं जा रहे। गांव में ढाई-तीन सौ लोग बीमार पड़े हैं, तीन-चार ही वहां इलाज के लिए गए होंगे।
इमरजेंसी में रोगियों की बहुत संख्या रहती है। इस वजह से मरीज को भर्ती करने में समय लग जाता है। एक-एक रोगी की हिस्ट्री ली जाती है, इसके बाद भर्ती किया जाता है।
डॉ. रिचा गिरि, उप प्राचार्य एवं मेडिसिन विभागाध्यक्ष, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज