कानपुर में तेज बुखार के साथ प्लेटलेट्स काउंट गिरकर 30 हजार आने और सांस तंत्र फेल होने सरीखे जिन लक्षणों को स्वास्थ्य विभाग के अफसर विचित्र बुखार कह रहे हैं, दरअसल वे स्क्रब टाइफस बीमारी के लक्षण हैं। शहर में स्क्रब टाइफस की जांच नहीं होती तो इसे नजरअंदाज किया जा रहा है।
दिल्ली में कराई जा रही जांचों में कई रोगियों में स्क्रब टाइफस की पुष्टि हो चुकी है, लेकिन अभी तक ज्यादातर फिजीशियन इसे पहाड़ी इलाकों की बीमारी मानकर अनदेखी कर रहे हैं। पिछले साल मसवानपुर की रहने वाली नेहा दुबे (27) का तेज बुखार के साथ प्लेटलेट्स काउंट कम हो गया।
डेंगू की जांच निगेटिव थी। डॉक्टरों ने इसे विचित्र बुखार करार दे दिया। हालत जब अधिक बिगड़ी तो परिजन उसे नोएडा ले गए। जांच की गई तो स्क्रब टाइफस की पुष्टि हुई। उसे कई दिन वेंटिलेटर पर रहना पड़ा। उसका अभी भी इलाज चल रहा है। शहर के किसी भी डॉक्टर ने स्क्रब टाइफस की डायग्नोसिस नहीं की थी।
इसी तरह शहर के 15 रोगियों को स्क्रब टाइफस की पुष्टि दिल्ली स्थित एक निजी लैब ने की थी। हैलट और निजी अस्पतालों में भर्ती बहुत से रोगियों की डेंगू, कोरोना रिपोर्ट निगेटिव है लेकिन उनका प्लेटलेट्स डाउन है। लिवर, गुर्दा और सांस तंत्र भी प्रभावित है, लेकिन स्क्रब टाइफस की जांच नहीं हुई है।
रोगियों में पुष्टि से साबित है कि यह रोगाणु शहर में है। जीएसवीएम मेडिकल कालेज के मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. जेएस कुशवाहा का कहना है कि स्क्रब टाइफस की संभावना रहती है। इस संक्रमण से लिवर, किडनी के साथ जीबी सिंड्रोम भी हुआ है। यहां जांच की सुविधा नहीं है, लेकिन रोगियों को ऐसी दवाएं दी जाती हैं कि बीमारी ठीक हो जाए।
स्क्रब टाइफस
यह रोग ओरिंशिया सुटसुगमूशी नामक बैक्टीरिया से फैलता है। यह माइट के काटने से शरीर में पहुंचता है। यह माइट झाड़ियों में रहता है। इसे बुश टाइफस भी कहते हैं। इस माइट के अधिक झाडियों वाले घरों के लॉन, शहर के बाहरी खरपतवार वाले इलाके, गंदगी, जलभराव वाली जगह जहां घास उग आती है में रहने की संभावना होती है।
लक्षण
-तेज बुखार, कंपकंपी भी हो सकती है
-सिर दर्द, शरीर की मांसपेशियों में दर्द
-शरीर में चकत्ते, प्लेटलेट्स कम होना
-भूख न लगना, जी मिचलाना, पेट दर्द
-खांसी आना