उधर, निरीक्षण के बाद चीफ इंजीनियर पीडब्ल्यूडी संजीव भारद्वाज ने बताया कि पुल का पिलर नंबर 10 पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। इसमें बीच में मोटी दरार पड़ने के साथ ही एक हिस्सा ढह चुका है। इसके अलावा पिलर नंबर 22, 21, 14 में भी दरारें पड़ने के साथ प्लास्टर उखड़ चुका है। प्रथम दृष्टया कहा जा सकता है कि पुराने गंगापुल आवागमन नहीं हो सकता और नहीं इसकी मरम्मत कराई जा सकती है। क्योंकि अब यह मरम्मत योग्य नहीं है। पुल बेकार हो चुका है, इस सवाल पर कहा कि यह अभी स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता है। टीम के सदस्य निरीक्षण के बाद आपस में विचार विमर्श के बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचेंगे। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। निरीक्षण के बाद टीम के सदस्य कानपुर सरसैया घाट की ओर रवाना हो गए। इस दौरान एई सेतु निगम धर्मेंद्र कुमार व एके सागर आदि मौजूद रहे।
पुल मियाद पूरी कर चुका है, सीआरआरआई से जांच कराना व्यर्थ
मुख्य अभियंता सेतु निगम सलिल यादव ने बताया की पुल काफी पुराना है। अपनी मियाद भी पूरी कर चुका है। एक पुल की मियाद 100 साल होती है, पुराना गंगापुल डेढ़ सौ साल का हो चुका है। इस तरह 50 साल अधिक पुल पर वाहनों को चलाया गया। उन्होंने बताया कि जब पुल मरम्मत योग्य लग ही नहीं रहा है तो फिर सीआरआरआई से जांच कराना व्यर्थ ही समझा जाएगा। जांच में लगभग दो करोड़ रुपये का खर्च आ रहा है। यदि जांच कराई जाती है तो यह धनराशि व्यर्थ साबित होगी।