हलुवाखेड़ा नाला पांच साल पहले टैप किया गया था, पर क्षमता से ज्यादा गंदा पानी आने की वजह से नाला ओवरफ्लो होता है। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने इन नालों को टैप करने के लिए 61.50 करोड़ का प्रस्ताव तैयार कर शासन के माध्यम से एनएमसीजी को भेजा था। अब एनएमसीजी ने संबंधित विभागों से एनओसी मांगी है।
तीन नालों (गोला घाट, सत्तीचौरा और मेस्कर घाट) में गंगा के किनारे की जमीन छावनी परिषद की बताई जा रही है। अन्य नालों के किनारे की जमीन सिंचाई विभाग की है। निरीक्षण में नगर निगम के मुख्य अभियंता एसके सिंह, गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के प्रोजेक्ट मैनेजर ज्ञानेंद्र चौधरी और सिंचाई विभाग के अफसर मौजूद रहे।
गंगा और पांडु नदी में गिर रहे सात नाले जिन स्थानों में टैप करने हैं, वहां निरीक्षण किया गया है। छावनी परिषद और सिंचाई विभाग से एनओसी मांगी है। शासन के माध्यम से एनओसी एनएमसीजी को भेजी जाएगी। वहां से धन आवंटित होते ही नालों को टैप करने का काम शुरू हो जाएगा। -ज्ञानेंद्र चौधरी, प्रोजेक्ट मैनेजर, गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई