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UP: मिट्टी-पानी पर कीटनाशकों से पड़ रहे दुष्प्रभाव को पता कर रहे वैज्ञानिक, हरियाणा के 11 जिलों में टेस्टिंग शुरू

Mon, 30 May 2022 11:49 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अवनी कुमार ने बताया कि संरक्षित खेती किसानों के लिए लाभदायक है। इससे न सिर्फ फसल सुरक्षित रहती है, बल्कि उत्पादन भी बढ़ जाता है।
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सीएसए कानपुर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कीटनाशकों से फसलों, मिट्टी और पानी पर पड़ रहे दुष्प्रभाव को पता करने के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने हरियाणा के 11 जिलों में मिट्टी और पानी की टेस्टिंग चालू कर दी है। वैज्ञानिक यह भी पता करेंगे कि इन कीटनाशकों से उगने वाली फसल से शरीर को कितना नुकसान पहुंच रहा है। ये बातें सीएसए में उद्यानिकी फसलों एवं जलवायु परिवर्तन पर चल रहे चार दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार के तीसरे दिन हरियाणा के उद्यान महानिदेशक डॉ. अर्जुन सिंह सैनी ने कहीं।

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डॉ. सिंह ने बताया कि खेतों से मिट्टी और नलकूप, तालाब, नहर आदि से पानी के नमूने लिए जा रहे हैं। किसानों के सहयोग से सर्विलांस टीम बनाई गई है। मिट्टी के नमूनों में कीटनाशकों के दुष्प्रभाव के स्तर को देख रहे हैं। इसमें मैक्सिमम रेसिड्यू लिमिट (एमआरएल) कहते हैं। प्रारंभिक जांच में एमआरएल 11 से 17 फीसद मिली है जो खतरनाक नहीं है। अब इसके शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव की जांच कराई जा रही है।

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फिर रिपोर्ट आईसीएआर (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) भेजी जाएगी। इस मॉडल को अन्य प्रदेशों पर भी लागू किया जा सकता है। इस मौके पर डॉ. डीआर सिंह, डॉ. श्वेता यादव, डॉ. खलील खान, बबिता सिंह आदि मौजूद रहे। 

किसानों के लिए लाभदायक है संरक्षित खेती 
इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अवनी कुमार ने बताया कि संरक्षित खेती किसानों के लिए लाभदायक है। इससे न सिर्फ फसल सुरक्षित रहती है, बल्कि उत्पादन भी बढ़ जाता है। कहा, कृषि विज्ञान केंद्रों और अन्य संस्थाओं में वैज्ञानिक पूरी तरह से जानकार नहीं हैं, इसी कारण किसान कृषि उपकरणों का सही से प्रयोग करना नहीं सीख पा रहे हैं। 
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