कीटनाशकों से फसलों, मिट्टी और पानी पर पड़ रहे दुष्प्रभाव को पता करने के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने हरियाणा के 11 जिलों में मिट्टी और पानी की टेस्टिंग चालू कर दी है। वैज्ञानिक यह भी पता करेंगे कि इन कीटनाशकों से उगने वाली फसल से शरीर को कितना नुकसान पहुंच रहा है। ये बातें सीएसए में उद्यानिकी फसलों एवं जलवायु परिवर्तन पर चल रहे चार दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार के तीसरे दिन हरियाणा के उद्यान महानिदेशक डॉ. अर्जुन सिंह सैनी ने कहीं।
डॉ. सिंह ने बताया कि खेतों से मिट्टी और नलकूप, तालाब, नहर आदि से पानी के नमूने लिए जा रहे हैं। किसानों के सहयोग से सर्विलांस टीम बनाई गई है। मिट्टी के नमूनों में कीटनाशकों के दुष्प्रभाव के स्तर को देख रहे हैं। इसमें मैक्सिमम रेसिड्यू लिमिट (एमआरएल) कहते हैं। प्रारंभिक जांच में एमआरएल 11 से 17 फीसद मिली है जो खतरनाक नहीं है। अब इसके शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव की जांच कराई जा रही है।