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कानपुर: गंगा की सहायक नदी पांडु को पुनर्जीवित करने का संघ ने तैयार किया मास्टर प्लान

Mon, 12 Jul 2021 04:08 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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पांडु नदी - फोटो : amar ujala
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की इकाई गंगा समग्र की प्रांतीय बैठक के आखिरी दिन पांडु नदी को पुनर्जीवित करने का फैसला लिया गया। बीएनएसडी स्कूल परिसर में हुई बैठक में गंगा समग्र के राष्ट्रीय संगठन मंत्री रामाशीष ने कहा कि फर्रुखाबाद से शुरू होकर फतेहपुर तक की 120 किमी लंबी इस नदी पर योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाएगा। इसके लिए कई चरणों में काम करने की आवश्यकता है।
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उन्होंने बताया कि काम करने वालों की बड़ी टोली, एक तकनीकी टोली, एक संगठनात्मक टोली और एक स्वच्छता टोली का गठन किया जाएगा। इसके माध्यम से पांडु नदी को उसके स्वरूप में लाने के लिए कौन सी दिक्कतों को दूर करना है, उसका भी अध्ययन किया जाएगा। टोलियों के गठन की जिम्मेदारी गंगा समग्र के प्रांत संयोजक राघवेंद्र सिंह को दी गई। रामाशीष ने बताया कि गंगा में उसकी सहायक नदियों के माध्यम से करीब 57 प्रतिशत जल आता है।
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पांडु नदी भी गंगा की सहायक नदी है। दो सत्रों में आयोजित गोष्ठी के दौरान संगठन के अभी तक के कामों की समीक्षा भी की गई। इसके साथ ही गंगा समग्र के सभी जिलों के प्रभारी भी घोषित किए गए। बैठक में प्रांत संयोजक राघवेंद्र, प्रांत संगठन मंत्री विजय राज, प्रांत सह संयोजक अजमेर, शिवबोधन, राजेश, अटल आदि मौजूद रहे।

गंगा समग्र प्रांत इकाई के जिला प्रभारी
महेंद्र पाल फर्रुखाबाद, डॉ. भक्ति विजय शुक्ला कन्नौज, शिवराज बिल्हौर, अनुराग त्रिपाठी कानपुर पश्चिम, अनिल सिंह बाबा कानपुर उत्तर, महेंद्र विक्रम कानपुर पूर्व, उमेश निगम फतेहपुर, शिवबोधन खागा 

आसान नहीं है पांडु नदी का स्वरूप लौटाना
पांडु नदी की सबसे ज्यादा दुर्दशा कानपुर में है। ऐसे में इसको पुराने स्वरूप में लौटाना गंगा समग्र के लिए आसान नहीं होगा। लंबे समय से सरकारी उपेक्षा की वजह से इस नदी के दोनों किनारों पर बड़ी मात्रा में अवैध निर्माण हो गए हैं। कई नाले सीधे नदी में गिरते हैं और दर्जनों औद्योगिक इकाइयों का हानिकारक कचरा भी इसी नदी में बहाया जा रहा है। शासन, प्रशासन की जानकारी के बावजूद आज तक कोई ठोस कदम इस नदी के लिए नहीं उठाया गया।
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