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राजनीति में आने से पहले शिक्षक हुआ करते थे मुलायम, बच्चों के थे 'फेवरेट टीचर'

Tue, 05 Sep 2017 09:06 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर

सार


 
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मुलायम स‌िंह यादव
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विस्तार
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भारत की राजनीति में अगर कुछ महान नेताओं की बात की जाए तो मुलायम सिंह यादव उनमें से जरुर एक होंगे। मुलायम सिंह यादव की महानता आप सिर्फ इसी बात से लगा सकते है क‌ि उन्होंने बहुत कम उम्र में ही जितने चुनाव लड़े वह बहुमत से जीते।
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1960 में राजनीतिक जिंदगी की हुई थी शुरुआत

जेपी मूवमेंट के दौरान चंद्रशेखर के साथ मंच पर मुलायम स‌िंह यादव
समाजवादी पार्टी की स्थापना करने वाले ऐसे महान नेता ने देश के लिए बहुत कुछ किया है। उनकी राजनीतिक जिंदगी 1960 से प्रारंभ हुई जब वह पहली बार उत्तर प्रदेश की असेंबली का चुनाव जीते और अपनी जीत को ऐसे दोहराते हुए लोकसभा में अब तक पांच बार अपनी जीत दर्ज कर चुके है।

यूनाइटेड फ्रंट की सरकार में रहते हुए 1996 से 1998 तक मुलायम सिंह यादव ने रक्षा मंत्री का कार्यभार संभाला और देश की रक्षा नीतियों में सहयोग भरपूर सहयोग किया। मुलायम सिंह यादव लोकसभा में पहली बार 1996 में चुनकर आए थे। इसके अलावा मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के तीन बार गौरवान्वित मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं।

उन्होंने पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में 1989 से 1991 तक फिर 1993 से 95 तक और आखरी बार 2003 से 2007 तक पदभार संभाला और जनता के साथ कदम से कदम मिलकर चलते हुए, प्रदेश को प्रगति के रास्ते पर ले गए।

 

ह‌िंदी प्रेमी मुलायम पढ़ाया करते थे अंग्रेजी

मुलायम स‌िंह यादव
क्या आप जानते हैं यूपी के पूर्व म‌ुख्यमंत्री मुलायम स‌िंह यादव राजन‌ीत‌ि में आने से पूर्व बतौर श‌िक्षक अध्यापन का कार्य कर चुके हैं..? तीन बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके म‌ुलायम स‌िंह यादव ने अपना शैक्षण‌िक कर‌ियर करहल क्षेत्र के जैन इंटर कॉलेज से श‌ुरू क‌िया था। उनके साथ पढ़ाने वाले श‌िक्षक और बच्चों को उनकी स‌िखाई गई एक-एक बात याद है। वे अपने साथ‌ियों से कहा करते थे क‌ि श‌िक्षक हमेशा श‌िष्य रहता है। उसे प्रत‌िदन कुछ न कुछ नया सीखना चाह‌िए।




 

यहां से हुई शुरुआत

मुलायम स‌िंह यादव
1955 में मुलायम स‌िंह यादव ने जैन इंटर कॉलेज में कक्षा नौ में प्रवेश ल‌िया था। यहां से 1959 में इंटर करने के बाद 1963 में यही सहायक अध्यापक के तौर पर अध्यापन का कार्य शुरू कर द‌िया था। उस दौर में उन्हें 120 रुपए मास‌िक वेतन म‌िलता था।

लगभग 11 साल बाद 1974 में वे यहीं पार राजनीत‌ि शास्त्र के प्रवक्ता के तौर पर प्रोन्नत हुए। राजनीत‌िक महत्वकांक्षा के चलते उन्होंने 1984 में यहां से त्याग पत्र दे द‌िया। इसके बाद मुलायम स‌िंह का राजनीत‌िक कर‌ियर शुरू हुआ। इस दौरान 1967 में वे जसवंतनगर में व‌िधायक भी बने। 
 

कुछ ऐसे था मुलायम स‌िंह का पढ़ाने का स्टाइल

जैन इंटर कॉलेज के मुख्यद्वार की तस्वीर
जैन इंटर कॉलेज में मुलायम स‌िंह को एक खास बात के ल‌िए व‌िशेषतौर पर याद क‌िया जाता रहा। दरअसल, वे ‌क‌िसी श‌िक्षक की तरह रटा- रटाया पाठ बच्चों को नहीं पढ़ाते थे। वे व‌िषय मे रोचकता लाने में माह‌िर थे। मुलायम स‌िंह बच्चों को मारने पीटने के सख्त व‌िरोधी रहे हैं। उनका कहना है क‌ि बच्चों को मारने से उनकी बुद्ध‌ि का कौशल व‌िकास रुक जाता है। 

 
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बच्चों के थे फेवरेट टीचर

करहल स्थ‌ित जैन इंटर कॉलेज में म‌ुलायम स‌िंह की तस्वीर
मुलायम स‌िह बच्चों के फेवरेट टीचर हुआ करते थे। उनका पढ़ाने का अंदाज बच्चों को बेहद पसंद आता था। उन्होंने हाई स्कूल में ह‌िंदी और इंटर में सामाज‌िक व‌िज्ञान पढ़ाया। उनकी कक्षा में बच्चे एकाग्रच‌ित होकर उनकी बातें सुना करते थे। उनमें तब भी व‌िशेष गुण हुआ करता था। वे बच्चों में भी इन गुणों का व‌िकास करते थे।
 
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