रक्षाबंधन का पर्व 26 अगस्त को मनाया जाएगा। भाई-बहन के अटूट रिश्ते के प्रतीक इस त्योहार में प्रेम के धागे की अपनी ही खासियत है। इस पतले से धागे में बहना का अटूट प्रेम और भइया का जीवन भर रक्षा का संकल्प समाहित होता है। वैसे तो इस त्योहार की कई मान्यताएं हैं लेकिन अगर वैदिक रीति से बात करें तो इस प्रेम के धागे की शुभता और बढ़ाई जा सकती है। यह शुभता भइया के जीवन में ऊर्जा का संचार कर प्रेम को बढ़ाती है। विद्वानों की माने तो अगर राखी का चयन राशि के अनुसार किया जाए तो उसके भविष्य में शुभ परिणाम मिल सकते हैं।
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रक्षाबंधन
पंडितों की माने तो राशि अनुसार राखी का चयन करना काफी शुभदायक रहेगा। 26 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन भद्रा काल नहीं है। पूरे दिन राजयोग होने के कारण बहनें भइयों को राखी बांध सकती हैं। हालांकि शाम 4:30 से छह बजे तक राहु काल रहेगा। बहनें राहुकाल में राखी बांधने से बचें। बहनें भइया को राखी बांधने के बाद कुमकुम के तिलक के साथ चावल लगाएं। शास्त्रों में यह तिलक अति उत्तम माना गया है।
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रक्षाबंधन
शास्त्रों के अनुसार ऐसा तिलक विजय, पराक्रम, सम्मान, श्रेष्ठता और वर्चस्व का प्रतीक होता है। तिलक मस्तक के बीच में लगाया जाता है। यह स्थान छठी इंद्री का है। इसका वैज्ञानिक कारण यह है कि अगर शुभ भाव से मस्तक के इस स्थान पर तिलक के माध्यम से दबाव बनाया जाए तो स्मरण शक्ति, निर्णय लेने की क्षमता, बौद्धिकता, तार्किकता, साहस और बल में वृद्धि होती है।
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किस राशि के लिए कौन सी राखी शुभ
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मेष- लाल वृष- नीला मिथुन-हरा कर्क-सफेद सिंह-नारंगी कन्या-हरा और बैंगनी
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तुला-गाढ़ा सफेद या नीला वृश्चिक-लाल और पीला मिक्स धनु-पीला मकर-बैंगनी कुंभ-नीला मीन-पीला
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श्रीकृष्ण ने निभाया था भाई का कर्तव्य
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रक्षा बंधन हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में एक है। इसमें संपूर्ण समाज को जोड़ने की मूलभावना छिपी है। इस त्योहार को लेकर कई कथाएं और मान्यताएं प्रचलित हैं। आचार्य दीपक पांडेय और आचार्य पवन तिवारी ने बताया कि द्वापर युग में द्रोपदी ने श्रीकृष्ण के चोट लगने पर अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर हाथ में बांधा था। तब श्रीकृष्ण ने कौरवों की सभा में चीरहरण के दौरान द्रौपदी की लाज बचाई थी।
साथ ही जीवन पर्यंत द्रौपदी के सुहाग की रक्षा की। तभी से यह पर्व मनाया जाता है। उनके मुताबिक इसी दिन अमरनाथ में शिवलिंग अपना पूर्ण रूप धारण करता है। मान्यता है कि इसी दिन सफेद कबूतर के जोड़े के भी दर्शन होते है, जो पुरातन काल से इसी गुफा में निवास करते है। यह जोड़ा अजर-अमर है।