कानपुर देहात। कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच जिले में डेंगू ने दस्तक दे दी है। डेंगू की चपेट मेें आकर अकबरपुर क्षेत्र के एक निजी अस्पताल कर्मी की रविवार देर शाम कानपुर के अस्पताल में मौत हो गई। वहीं डेंगू जैसे लक्षणों से पीड़ित एक युवक को प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हैरत की बात यह है कि स्वास्थ्य महकमे को इसकी भनक तक नहीं है।
डेरापुर तहसील क्षेत्र के दुर्जनपुरवा गांव निवासी विश्वप्रताप सिंह उर्फ राहुल (35) पत्नी व बच्चे के साथ अकबरपुर जिला अस्पताल के पास रह रहा था। वह नबीपुर स्थित गौरी हॉस्पिटल मेें काम करता था। तेज बुखार आने पर वह 20 अगस्त को गौरी अस्पताल में भर्ती हुआ था। किट से जांच में डेंगू होने की पुष्टि हुई। हालत बिगड़ने पर 21 अगस्त को परिजन कानपुर के निजी अस्पताल में ले गए।
वहां रविवार देर शाम उसकी मौत हो गई। जिस पर पत्नी उर्मिला सहित अन्य परिजनों में कोहराम मच गया। मृतक घर का एकलौता था और पिता की पूर्व मेें मौत हो चुकी है। गौरी अस्पताल के एमडी विजय बाजपेई ने बताया कि उनके अस्पताल में काम करने वाले युवक की किट से जांच में डेंगू होने की पुष्टि हुई थी।
हालत गंभीर होने पर कानपुर रेफर किया गया था। उन्होंने बताया कि डेरापुर क्षेत्र के बलहारामऊ गांव निवासी शैलेंद्र कटियार में भी डेंगू जैसे लक्षण मिले हैं। उसे भर्ती कर इलाज किया जा रहा है।
डेंगू से प्राइवेट अस्पताल कर्मी की मौत होने की जानकारी नहीं है। अस्पताल ने सूचना क्यों नहीं दी, इसकी जानकारी कराई जाएगी। जिला अस्पताल में किट से डेंगू की जांच की सुविधा है। मच्छर प्रभावित क्षेत्र में टीम भेजकर एंटी लार्वा का छिड़काव व फॉगिंग कराई जाएगी। मृतक युवक के आसपास के 20 घरों में टीम भेजकर लार्वा के स्रोत का पता लगाया जाएगा। - डॉ. एके सिंह (सीएमओ)
जिले में नहीं एलाइजा टेस्ट की सुविधा
डेंगू होने पर मरीज के रक्त का नमूना लेकर उसका एलाइजा टेस्ट किया जाता है। जिले में अभी तक डेंगू की जांच के लिए जिला अस्पताल से लेकर प्राइवेट अस्पतालों में एलाइजा टेस्ट की सुविधा नहीं है। अधिकांश मामलों में किट से जांच की जाती है, लेकिन इसकी पुष्टि एलाइजा से ही होती है।
जिले में किट से डेंगू की पुष्टि होने के बाद मरीज का सैंपल एलाइजा टेस्ट के लिए कानपुर मेडिकल कॉलेज या उर्सला भेजा जाता है। वहां से रिपोर्ट आने में दो-तीन दिन का समय लग जाता है। जिससे कई बार मरीज की जान पर बन आती है।
प्लेटलेट्स घटी तो रेफर किए जाते मरीज
डेंगू मरीजों का एलाइजा टेस्ट न होने के कारण जिला अस्पताल के डॉक्टर अब शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या के आधार पर इलाज करने को मजबूर हैं। सीएमएस ने बताया कि स्वस्थ शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या 1.50 लाख से साढ़े चार लाख के बीच होती है।
डेंगू की संभावना वाले मरीजों में प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से गिरती है। ऐसे में उनकी सीवीसी (कंप्लीट ब्लड काउंट) जांच कराकर हर रोज नजर रखी जा रही है। 40 हजार से कम प्लेटलेट्स होने पर मरीज को गंभीर मानकर रेफर कर दिया जाता है। क्योंकि डेंगू की पुष्टि के बिना समुचित इलाज हो पाना संभव नहीं है।
कागजों पर तैयार होती डेंगू से बचाव की योजना
जिले मेें तकरीबन हर साल बारिश के दौरान डेंगू कहर बरपाता है। बचाव के लिए स्वास्थ्य महकमे के अफसर कागजों पर लंबी-चौड़ी कार्ययोजना भी बनाते हैं, लेकिन असलीजामा पहनाने मेें खानापूरी कर दी जाता है। पिछले दिनों जोरदार बारिश के चलते राजपुर, मूसानगर, सिकंदरा क्षेत्र में 29 गांव बाढ़ की चपेट में आए थे।
अन्य क्षेत्रों में भी नदी-नाले, तालाब पानी से लबालब हैं। अब जलजमाव वाले इलाके में पानी कम हो रहा है, लेकिन गंदगी के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ने लगा है, लेकिन मच्छरों को नियंत्रित करने के लिए अभी मलेरिया विभाग भी कोई खास कार्रवाई नहीं कर रहा।