प्रधानी चुनाव में एड़ी चोटी का जोर लगाकर जीत दर्ज करने वाले जिले के दो
सैकड़ा प्रधानों को कुर्सी पर बैठने के लिए अभी इंतजार करना पड़ेगा।
ये उन
गांवों के ग्राम प्रधान हैं, जहां दो तिहाई ग्राम सदस्य जीतकर नहीं पहुंचे
हैं। ऐसे निर्वाचित ग्राम प्रधान विकास जैसे कामकाज से दूर ही रहेंगे। इन
ग्राम सभाओं की जिम्मेदारी ब्लाकों के एडीओ पंचायत देखेंगे।
जिले के 10
ब्लाकों में मैथा ब्लाक सहित 200 ग्राम सभाएं असंगठित हैं। इन ग्रामों में
सदस्यों का कोटा पूरा नहीं है। नियमानुसार दो-तिहाई सदस्यों का होना
अनिवार्य है।
जिले की 640 ग्राम सभाओं में 440 ग्राम सभाएं संगठित हैं। इन
ग्राम सभाओं के प्रधान जीतने के बाद कामकाज संभालेंगे। लेकिन 200 ग्राम
सभाओं में प्रधानों को छह माह तक इंतजार करना पड़ेगा।
मैथा ब्लाक में 22
ग्राम सभाएं असंगठित हैं। इनमें सुनवर्षा, अलियापुर, टिकरी, मदारपुर,
कैरानी, आंट, जैतपुर शिवली, करोम, रावतपुर, औंगी, अरशदपुर, तातमऊ, मारग,
भंवरपुर, जुगराजपुर शिवली, मलिकपुर, लमहारा, कारीकलवारी, कड़नी, ढिकिया,
बाराखेड़ा ग्राम सभाएं असंगठित है। इनमें प्रधानों को कुर्सी के लिए इंतजार
करना पड़ेगा।
कोरम नहीं पूरा होने के बारे में जिला पंचायतराज अधिकारी
शिवशंकर सिंह ने बताया कि असंगठित ग्राम सभाओं में प्रशासक तैनात किया
जाएगा। प्रशासक के रूप में ब्लाक के एडीओ पंचायत की तैनाती की जाएगी।