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UP News: सियासत की चौसर पर उलझीं सियासी पार्टियां, हर सीट पर है अलग-अलग समीकरण, अपने ही दे रहे हैं चुनौती

Thu, 11 May 2023 02:30 PM IST
हिमांशु अवस्थी तारिक इकबाल, अमर उजाला, कन्नौज

सार

Kannauj News: जिले की आठ नगर निकाय सीट पर हो रहे चुनाव ने सियासी पार्टियों को उलझाया हुआ है। कहीं अपनों ने भीतरघात किया है, तो कहीं प्रतिद्वंदी से ज्यादा बागी सिरदर्द बने हैं।
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कन्नौज निकाय चुनाव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कन्नौज जिले में  सियासी शोर थम गया है। मैदान में ताल ठोकने वाले सियासी चेहरे अब अपने-अपने खेमे में जा चुके हैं। बारी अब जनता की है। किस में कितना जोर है, इसका जवाब 13 मई को घोषित होने वाले चुनाव परिणाम तय कर देगा। ऐसे में सियासत की चौसर बिछाए बैठीं सियासी पार्टियां अपने उठाए कदम के साथ ही अपने प्रतिद्वंदी की चाल पर भी नजर रख रही हैं।

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वह इस उलझन में हैं कि उनके तरकश से निकले तीर कितना निशाने पर लगते हैं। खुशबू के शहर में भी सियासत के अलग-अलग नजारे देखने को मिल रहे हैं। कहीं भीतरघात हावी है तो कहीं अपनों ने ही बगावत कर ली है। अपनी राह का कांटा साफ करने के लिए किसी ने दूसरे की राह में रोड़े डाल रखे हैं। सियासत के इस दंगल की तमाशबीन बनी अवाम हर दांव को देखकर हैरत भी जता रही है।
मैदान सभी को फतह करना है। हारना कोई नहीं चाहता। जहां अपनी राह पथरीली लग रही है, वहां सामने वाले के लिए खाई भी खोद दी गई है। बड़े नाम वाली सियासी जमात को अपनी साख और इज्जत के दांव पर लगे होने का भी अहसास है। बिना किसी दल के सियासत के दलदल में उतरने वाले भी इस सियासी दंगल में किसी से पीछे नहीं रहना चाह रहे हैं। इसका फैसला 13 मई को बैलेट बॉक्स खुलने पर ही होगा।

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सदर में मची है सबसे ज्यादा गदर
खुशबू के शहर में सबसे ज्यादा सियासी गदर मची है। कन्नौज जिले की आठ सीट में सबसे ज्यादा हॉट सीट सदर नगर पालिका ही बनी हुई है। पांच ग्राम सभा के जुड़ने से इस नगर पालिका का न सिर्फ दायरा बढ़ गया है, बल्कि वोटर लिस्ट भी लंबी हो गई है। यहां दो मुख्य चेहरे पिछली बार की ही तरह फिर से मैदान में हैं। पिछली बार जनता की लहर पर सवार होकर मैदान मारने वाले शैलेंद्र अग्निहोत्री इस बार अपनी मां के सहारे फिर से मैदान में हैं।

पिछली बार की ही तरह इस बार भी उन्हें उनकी पार्टी भाजपा का साथ नहीं मिला। बगावत का ठप्पा लगाकर उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया गया। पिछली बार निर्दलीय ही मैदान में उतर कर दमखम दिखाने वाले पूर्व पालिकाध्यक्ष हाजी रईस अहमद बसपा के हाथी पर सवार होकर पत्नी कौसर जहां को सामने रखकर फिर से पालिका की कुर्सी पर काबिज होने की जुगत में हैं।

ट्रिपल इंजन की सरकार का भरोसा 
डबल इंजन को ट्रिपल इंजन की ताकत देने की कोशिश में जुटी भाजपा के टिकट से पहली बार यहां के बड़े उद्योगपति घराना मैदान में है। ऊषा दीक्षित को मैदान में उतार कर भाजपा लोकसभा और विधानसभा की ही तरह पालिका में भी कमल खिलाने की कोशिश में जुटी है। इन सबके बीच सपा सहित दूसरी सियासी पार्टियां और निर्दलीय भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

समधन से पूरी तरह वॉकआउट कर चुकी भाजपा को कई सीट पर भीतरघात का डर
देश-प्रदेश की सत्ता पर काबिज भाजपा ने जिले की आठ में से सात पर ही उम्मीदवार उतारा है। समधन नगर पंचायत से वह पहले ही बाहर हो चुकी है। यहां उसने अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है। इसके अलावा सिकंदरपुर और तालग्राम नगर पंचायत छोड़कर उसे हर सीट पर अपनों से ही जूझना पड़ रहा है।

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अपने ही दे रहे हैं चुनौती
कन्नौज, छिबरामऊ, तिर्वा, सौरिख में मान-मनौव्वल की हर कोशिश बेकार गई। कल तक जो अपने थे, वही सामने खड़े होकर चुनौती दे रहे हैं। ऐसे में अनुशासन का चाबुक चलाकर उन्हें पार्टी से निकाल तो दिया गया है, लेकिन यह कितना कारगर होगा यह नतीजों से ही साफ होगा। कन्नौज में उसके अपने रहे दो-दो निर्दलीय चुनौती दे रहे हैं। यही हाल तिर्वा में है। वहां भी दोहरी चुनौती है। सौरिख में बगावत खुल कर सामने आ चुकी है।

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