कानपुर में कमिश्नरेट लागू होने पर महिला अपराध के मामलों में भी पुलिस की कार्यशैली में बदलाव होगा। एक आईपीएस अफसर महिला अपराध पर अंकुश लगाने के लिए तैनात की जाएगी। शहर भर के महिला अपराध संबंधी मामलों की वो निगरानी करेंगी। ये बेहद अहम है। वहीं साइबर एक्सपर्ट के तौर पर पुलिस अफसर तैनात होंगे। दरोगा सिपाहियों की भी तैनाती की जाएगी, ये सभी साइबर में माहिर होंगे, जिससे साइबर अपराध पर अंकुश लगाने का प्रयास होगा।
नोएडा और लखनऊ में कारगर साबित हुई व्यवस्था
दंगा फसाद को नियंत्रित करना हो या संघटित अपराध पर अंकुश लगाने की बात हो। लखनऊ और नोएडा में काफी हद तक इसमें पुलिस को सफलता मिली है। कुछ समय पहले जब शासन ने एक साल की उपलब्धि गिनाई थी, उसमें तमाम आंकड़े पेश किए गए थे, जिससे साबित हुआ था कि क्राइम कंट्रोल में काफी हद तक कामयाबी मिली है। यही वजह है कि कानपुर और वाराणसी को कमिश्नरेट मिला।
ये अधिकार शायद नहीं मिलेंगे
कई अन्य प्रदेशों में लागू कमिश्नरेट सिस्टम में पुलिस के पास शस्त्र लाइसेंस जारी करने, होटलों के सराय एक्ट के तहत कार्रवाई करने, मनोरंजन कर संबंधी और बार लाइसेंस जारी करने का अधिकार पुलिस कमिश्नर के पास रहता है। लखनऊ और नोएडा पुलिस कमिश्नरेट के पास ये अधिकार नहीं थे। सूत्रों के मुताबिक कानपुर पुलिस कमिश्नरेट को भी ये अधिकार नहीं मिलेंगे।