सीएसए में डिस्टीलिटी यूनिट से तेल निकालते डॉ. आशीष श्रीवास्तव, डॉ. एचजी प्रकाश और डॉ. एसएन पांडे
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किसानों की आय बढ़ाने के लिए सीएसए के वैज्ञानिकों ने पारंपरिक खेती के साथ औषधीय और सुगंधीय पौधों को लगाने का तरीका खोजा है। वैज्ञानिकों ने कैंपस के फार्म में फसल के साथ खेत में ये पौधे लगाए। यहीं पर डिस्टीलेशन यूनिट लगा इन पौधों से तेल निकाला और बाजार में बेच दिया।
दावा किया एक फसल में तीन से चार लाख रुपये की अतिरिक्त आय इन पौधों से हो सकती है। एग्रोनामी विभाग के डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने दो शोध छात्रों जितेंद्र कुमार (पीएचडी) और रुद्रेश के. के संग यह तरीका खोजा है। डॉ. श्रीवास्तव ने कैंपस के एक हेक्टेयर में टमाटर की फसल के साथ सिट्रोनेला, लेमन ग्रास और पामारोजा के पौधे लगाए।
पौधों को विकसित होने के बाद डिस्टीलेशन यूनिट के माध्यम से उनका तेल निकाल कर बाजार में बेचा जिससे उनको खेती के साथ साथ अतिरिक्त आय हुई। एग्रोनामी विभाग के अध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि यदि कोई किसान इस मॉडल को अपनाना चाहता है तो विवि के वैज्ञानिक उसकी मदद करेंगे।
ऐसे लगाएं पौधे
डॉ. आशीष ने बताया कि इन पौधों को लगाने के लिए किसी अतिरिक्त जगह की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने टमाटर की खेती में औषधीय और सुगंधीय पौधों की एक पंक्ति बोई, जिसके बाद 3.5 मीटर जगह में टमाटर बोए। इसी प्रकार हर एक पंक्ति के बाद इसी मॉडल को अपनाया।
मीडिया प्रभारी डॉ. खलील खान ने बताया कि पौधों से तेल निकालने के लिए स्टेनलेस स्टील के टैंक, कंडेंसर और ऑयल सेप्रेटर को मिलाकर डिस्टीलेशन यूनिट को बनाया गया है। इस टैंक में पौधों को भरकर टैंक के नीचे आग लगाई जाती है। टैंक गर्म होने पर पौधों से मिलने वाला ऑयल और वाटर कंडेेंसर से होता हुआ ऑयल सेप्रेटर में आ जाता है। इसको ठंडा करने पर तेल और पानी अलग हो जाता है।
महंगा बिकता है तेल, साबुन-परफ्यूम बनाने में होता है उपयोग
सिट्रोनेला से निकलने वाले तेल परफ्यूम, मच्छर भगाने वाला ऑयल, रूम फ्रेशनर, हर्बल थैरेपी और सैनिटाइजर बनाने में काम आता है। इसकी बाजार में कीमत 1400 रुपया प्रति लीटर है। लेमन ग्रास से निकलने वाला तेल, दवा बनाने के काम में आता है।
बाजार में इसकी कीमत 1200 रुपया प्रति लीटर है। वहीं, पामारोजा से निकलने वाले तेल का उपयोग गुलाब जल, परफ्यूम और साबुन बनाने में किया जाता है। इसकी बाजार में कीमत 2600 रुपये प्रति लीटर है। एक हेक्टेयर में इन पौधों से 100 से 120 लीटर तक तेल पाया जा सकता है।