इस बीच अमर उजाला ने यह भी खुलासा किया था कि 2019 में जब शैलेंद्र सिन्हा की तैनाती कानपुर में थी, तो भी कई पासपोर्ट फर्जीवाड़ा कर बनवाए गए थे। साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने शैलेंद्र सिन्हा को भी आरोपी बनाया था। पहले उनको क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय लखनऊ से संबद्ध किया गया था। अब उनका तबादला चंडीगढ़ कर दिया गया है।
बचने की जुगत में आरोपी अफसर
फर्जीवाड़े का खुलासा हुए कई महीने हो गए हैं, लेकिन विभागीय स्तर पर शैलेंद्र सिन्हा के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। डिप्टी पासपोर्ट अफसर यशपाल को विभागीय जांच सौंपी गई थी। मगर अब उनका भी तबादला जालंधर कर दिया गया है। ऐसे में जांच एक तरह से ठप पड़ी है। अफसरों की उस पर मेहरबानी है। बचाने का भी खेल चल रहा है।