ओमिक्रॉन का खतरा बढ़ता जा रहा है। दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद से शहर आने वालों का पता नहीं चल रहा है। इससे अगर कोई संक्रमित शहर आ गया तो उसकी पहचान नहीं हो सकेगी। यह भी आशंका जाहिर की जा रही है कि ओमिक्रॉन संक्रमित कानपुर में हो सकता है लेकिन अभी तक उसकी पहचान नहीं हो पाई है।
ओमिक्रॉन का संक्रमण हल्का जुकाम-बुखार की शक्ल में फैलता है। इस वक्त वायरल संक्रमण का सीजन चल रहा है। लोग फ्लू की चपेट में हैं। ऐसे में संक्रमण फैलेगा भी तो पता नहीं चल पाएगा। सीएमओ डॉ. नैपाल सिंह का कहना है कि सारे प्वाइंट पर रैंडम सैंपलिंग की जा रही है।
इसके साथ ही नए प्वाइंट पर भी सैंपलिंग की जा रही है। ओमिक्रॉन प्रभावित देशों से लौटे लोगों की सैंपलिंग की जा रही है। लेकिन दूसरे प्रांतों और शहरों से आने वालों का कुछ पता नहीं है। बहुत से लोग दिल्ली, गाजियाबाद से अपने वाहनों और बसों से आ रहे हैं।
खांसी-जुकाम के लक्षण बहुत से लोगों को हैं। इससे ओमिक्रॉन का लक्षणों वाले व्यक्ति का पता नहीं चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों और सीएचसी पर मॉक ड्रिल कराकर स्टाफ को प्रशिक्षित कर दिया है। स्थानीय स्तर पर जीनोम सीक्वेंसिंग की जांच न होने से भी रोगियों की पहचान में देर हो सकती है।
सीएमओ डॉ. सिंह ने बताया कि सारे लोग मास्क पहनकर ही बाहर निकलें। इसके साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। ओमिक्रॉन से बचाव के लिए भी यही तरीका है। इसके साथ ही वैक्सीन लगवा लें।