कानपुर में यूसीसी बैंक के 25000 खाताधारकों के लिए राहत भरी खबर है। बैंक में उनकी जमा रकम का बीमा धन जनवरी में मिल सकता है। डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कारपोरेशन के डीजीएम दीपक नारंग ने बीमा धन जारी करने पर सहमति जता दी है।
रिजर्व बैंक ने एक साल पहले यूसीसी बैंक लाइसेंस निरस्त कर दिया था। एक साल बाद भी जमा राशि का बीमा धन न मिलने पर खाताधारकों ने हाईकोर्ट की शरण ली है। इसी के साथ ही बैंक के लिक्विडेटर भी लगातार रिजर्व बैंक पर बीमा धन के भुगतान का दबाव बना रहे थे।
मामले के तूल पकड़ने पर सोमवार को रिजर्व बैंक लखनऊ में विभागीय अधिकारियों व सहकारिता विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक हुई। इसमें विभिन्न बैंकों के लिक्विडेटर और मुंबई से आए डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कारपोरेशन के अधिकारी भी शामिल रहे।
बैठक में तय हुआ कि यूसीसी बैंक की नौ शाखाओं के खाताधारकों को उनका बीमा धन जनवरी में दिया जाएगा। शेष तीन शाखाओं का फिर से ऑडिट होगा। इसके बाद जो परिणाम आएगा उस आधार पर फैसला लिया जाएगा। इस पर लिक्विडेटर ने भी सहमति जताई। शहर से खाताधारकों का प्रतिनिधित्व कर रहे अपर जिला सहकारी अधिकारी संजय तिवारी ने बताया कि यूसीसी बैंक के करीब 25,000 खाताधारकों का 35 करोड़ रुपये बीमा धन बनता है।
नियमानुसार बैंक में ताला बंदी होने पर प्रत्येक खाताधारक को उसकी जमा रकम का एक लाख रुपये का बीमा होता है। यानी रकम डूब जाए तो अधिकतम एक लाख रुपये तो उसे मिलेंगे ही। यह बीमा डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कारपोरेशन की ओर से होता है। बैंक में खाताधारकों का कुल 66 करोड़ रुपये बकाया है।