कानपुर के मकसूदाबाद के हालात भी कुरसौली जैसे बन रहे हैं। मंगलवार को अनजान बुखार से यहां दूसरी मौत हो गई। इस रोगी को भी ब्लीडिंग हुई है। इसके अलावा बुखार की चपेट में आए आठ लोगों का निजी अस्पतालों में इलाज चल रहा है। हैरत की बात यह है कि अभी तक बीमारी की पहचान नहीं हो पाई है।
अब मकसूदाबाद के लोगों का भी वही सवाल है कि कौन सा रोग है? जो उन्हें बीमार कर रहा है। कुरसौली में भी बुखार के छह रोगी हैं। मकसूदाबाद के अरुण कुमार (53) को एक सप्ताह से बुखार आ रहा था। उनका इलाज विकासनगर के एक निजी अस्पताल में हो रहा था। दोपहर को मौत हो गई।
परिजनों ने बताया कि अरुण कुमार को भी ब्लीडिंग हुई थी। इसके पहले 12 अक्तूबर को मकसूदाबाद के बउन की बेटी सलोनी (17) की हैलट में मौत हो गई थी। स्वास्थ्य विभाग ने सलोनी की डेंगू रिपोर्ट निगेटिव बताई थी। अरुण कुमार को भी सलोनी जैसे लक्षण रहे हैं।
अरुण कुमार की दो बेटियां तन्नू और मन्नू तथा उनके भतीजे की पत्नी पूनम भी बुखार की चपेट में थीं, लेकिन इलाज से ठीक हो गईं। मकसूदाबाद के राम दिवाकर, मुन्नापाल, सुमित, गुड्डू, सुमन, गोलू तथा बबलू तिवारी की नातिन का अलग-अलग निजी अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
ये सभी बुखार के रोगी हैं। कुरसौली गांव के लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग बीमारी तो बताए। डेंगू, मलेरिया की जांच निगेटिव बताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी वायरल फीवर बता रहे हैं।