झाड़ियों में पाए जाने वाले जीव अगर संक्रमित हैं, तो उनके मांस से भी मंकी पॉक्स हो सकता है। डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ से कहा गया है कि पीपीई किट पहनकर रोगी का इलाज करें। इसके साथ ही रोगियों की कॉंटैक्ट ट्रेसिंग करके संक्रमण के दायरे की पहचान कर लें।
त्वचा रोग क्लीनिक, एसटीडी क्लीनिक, मेडिसिन, बालरोग की ओपीडी का सर्वेलांस बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। यह रोग बच्चों में अधिक पाया जाता है। बच्चों में मृत्यु दर भी अधिक होती। वर्तमान में इस रोग की मृत्यु दर तीन से छह प्रतिशत है। गाइड लाइन में रोग के लक्षणों के संबंध में भी बताया गया है।
छोटे बच्चों को डे केयर नर्सरी और भीड़ वाले स्थानों पर जाने से रोक ने के लिए कहा गया है। जो लोग संदिग्ध हैं लेकिन उनमें कोई लक्षण नहीं है, उन्हें हिदायत दी गई है कि निगरानी के दौरान रक्तदान न करें। संदिग्धों की निगरानी 21 दिनों तक किए जाने की अवधि तय की गई है।