यही वजह रही कि राजनारायण की ओर से आईजीआरएस पोर्टल पर की गई शिकायत पर भी झूठी रिपोर्ट लगाकर मामले को निस्तारित दिखा दिया गया। इसमें एक खनन इंस्पेक्टर की भूमिका संदिग्ध है। हालांकि यह सारा मामला खनन अधिकारी कुंवर पाल सिंह के संज्ञान में रहा है। उन्होंने कहा कि शिकायत मिली थी। मौके पर जांच भी कराई थी, लेकिन खनन करने वालों की पहचान नहीं हो सकी थी। गुरुवार को खनन अधिकारी ने फिर से मौके पर जांच की, मगर कार्रवाई का खाका देर रात तक तैयार नहीं कर सके।
खनन माफिया की सूची तक नहीं बनी
हैरत की बात देखिए कि खनन अधिकारी के कार्यालय में खनन माफिया की कोई सूची तक नहीं। यानी अधिकारियों और कर्मचारियों ने कभी खनन माफिया चिह्नित ही नहीं किए। जबकि खनन इंस्पेक्टरों ने अलग-अलग व्यक्तियों के डंपर, ट्रैैक्टर और जेसीबी को कई बार पकड़ा है। मगर जुर्माना और रिश्वत के दम पर हर बार छूट जाते हैं। बार बार पकड़े जाने वालों के वाहनों की जब्ती नहीं हुई।
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए इस पर नजर है। देख रहे हैं कि अवैध खनन रोक न पाने में किसकी भूमिका है। इस पर जल्द ही किसी नतीजे पर पहुंचेंगे।
विशाख जी. डीएम