आतंकी संगठन आईएसआईएस के सदस्य आतिफ मुजफ्फर और मोहम्मद फैसल को एटीएस/एनआईए के विशेष न्यायाधीश दिनेश कुमार मिश्रा ने फांसी की सजा सुनाई है। दोनों पर करीब 12-12 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। बीते दिनों कोर्ट ने दोनों को कानपुर के एक शिक्षक रमेश बाबू शुक्ला के हाथ में बंधे कलेवा से हिंदू पहचान सुनिश्चित कर हत्या करने पर दोषी करार दिया था।
प्रधानाचार्य रमेशबाबू शुक्ला की हत्या में सजा पाए दोनों आतंकियों को पाकिस्तान में बैठे आका वीडियो कॉलिंग के जरिये उन्हें गोली और बम चलाने की ट्रेनिंग देते थे। इसका खुलासा आरोपियों ने एटीएस से पूछताछ के दौरान किया था। उन्होंने बताया कि आकाओें के कहने पर ही उन्होंने रमेश बाबू शुक्ला को गोली मारी थी।
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एटीएस की टीम ने सात मार्च 2017 को लखनऊ के ठाकुरगंज में सैफुल्लाह को मुठभेड़ में मार गिरया था। उसके बाद पुलिस ने दोनों को जाजमऊ से गिरफ्तार कर लिया था। पूछताछ में दोनों ने बताया था कि उनका गिरोह पाकिस्तान में बैठे आकाओं से वीडियो कॉलिंग के जरिये ट्रेनिंग लेता था।
वारदात के दिन भी पॉकिस्तान ने उनके पास कॉल आई थी। जिसमें उनके आकाओं ने किसी काफिर का मार देने के आदेश दिए थे। जिसके बाद उन्होंने रिटायर्ड प्रधानाचार्य के हाथों में कलावा और माथे पर टीका उन्हें गोली मार दी थी।
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इलाके में उर्स की रौनक, आतंकियों के घर के छाया मातम
जाजमऊ में उर्स के अवसर पर चौतरफा रौनक थी, लेकिन आतंकियों के घर पर मातम छाया हुआ था। दोनों आतंकियों को फांसी की सजा सुनाई जाने के बाद उनके घरों के दरवाजे भी बंद मिले। यहां तक की उनके परिजन बातचीत करने से भी मना कर दिया।
हिंदू पहचान कर हत्या करने वाले दो आतंकियों को फांसी की सजा
आपको बता दें कि आतंकी संगठन आईएसआईएस के सदस्य आतिफ मुजफ्फर और मोहम्मद फैसल को एटीएस/एनआईए के विशेष न्यायाधीश दिनेश कुमार मिश्रा ने फांसी की सजा सुनाई है। दोनों पर करीब 12-12 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। बीते दिनों कोर्ट ने दोनों को कानपुर के एक शिक्षक रमेश बाबू शुक्ला के हाथ में बंधे कलेवा से हिंदू पहचान सुनिश्चित कर हत्या करने पर दोषी करार दिया था। इसके अलावा कोर्ट ने भारत की अखंडता, एकता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पहुंचाने, दूसरे समुदाय के लोगों को मारने व साजिश रचने समेत कई अन्य अपराधों में दोषी पाया था।
कोर्ट ने जुर्माने की रकम रमेश बाबू के आश्रितों को देने का आदेश दिया है। इसके पहले आतिफ और फैसल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये जेल से कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने सजा सुनाते हुए कहा कि दोषियों का अपराध विरलतम से विरल श्रेणी का है। इसे सामान्य हत्या की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। कहा कि इनको हाईकोर्ट से पुष्टि हो जाने के बाद फांसी दी जाएगी।
कोर्ट में एनआईए ने बताया की मामले कि रिपोर्ट वादी अक्षय शुक्ला ने कानपुर के चकेरी थाने में 24 अक्तूबर, 2016 को दर्ज कराई थी। इसमें बताया था की वादी के पिता व स्वामी आत्मा प्रकाश ब्रह्मचारी जूनियर हाई स्कूल के शिक्षक रमेश बाबू उसी दिन स्कूल से घर आ रहे थे। तभी किसी ने उन्हें गोली मार दी। अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई।
7 मार्च, 2017 को एटीएस सूचना मिली कि उज्जैन ट्रेन ब्लास्ट की साजिश में शामिल आईएस का आतंकी काकोरी रोड के पास एक मकान में है। एटीएस व पुलिस ने दबिश तो मुठभेड़ में सैफुल्लाह मारा गया।
सैफुल्लाह के घर से हथियार, गोला-बारूद के साथ ही आपत्तिजनक सामान जब्त किए गए। मामले की विवेचना एनआईए को सौंपी गई। एनआईए को पता चला कि सैफुल्लाह के घर से जो हथियार बरामद हुए थे उनका प्रयोग कानपुर के शिक्षक की हत्या समेत अन्य अपराधों में भी किया गया।