कानपुर में अधिवक्ता गौतम दत्त हत्याकांड में पुलिस ने 12 अधिवक्ताओं को बयानों के लिए नोटिस जारी किया है। इसमें घटनास्थल पर मौजूद वकीलों के साथ वे वकील भी शामिल हैं, जिनके नाम आरोपी ने पूछताछ में बताए थे। पुलिस इनके बयान दर्ज करने के बाद केस की विवेचना आगे बढ़ाएगी।
क्योंकि पुलिस की जांच हत्या, गैर इरादतन हत्या और लापरवाही से वारदात होने के बिंदु पर चल रही है। कचहरी में बीते शुक्रवार को बार का चुनाव स्थगित होने के बाद गोली लगने से अधिवक्ता गौतम दत्त की मौत हो गई थी। पुलिस ने गौतम की चाची संगीता की तहरीर पर भाजपा नेता तरु अग्रवाल व तीन अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।
शनिवार सुबह तरु ने थाने में सरेंडर कर दिया था। पुलिस ने उसको जेल भेज दिया था। मगर पुलिस को अभी तक हत्या के साक्ष्य नहीं मिले हैं। तरु ने पूछताछ में बताया था कि फायर मिस होने पर जब वह तमंचा देख रहा था उसी दौरान गोली चल गई थी। जो गौतम को लग गई थी।
सीसीटीवी फुटेज से स्पष्ट हुआ था कि घटना के वक्त कई प्रत्यक्षदर्शी वहां मौजूद थे। उधर, तरु ने पूछताछ में वहां मौजूद छह वकीलों के नाम बताए थे। केस के विवेचक एसीपी कोतवाली अशोक कुमार सिंह ने बताया कि कुल 12 वकीलों को बयान दर्ज कराने का नोटिस भेजा है।
अज्ञात आरोपियों का पता लगाने में जुटी पुलिस
केस में तीन अज्ञात आरोपी हैं। पुलिस इनकी पहचान करने का प्रयास कर रही है। जिससे उनकी भूमिका की जांच की जा सके। फिलहाल अभी तक एक भी अज्ञात आरोपी की पहचान नहीं की जा सकी है। पुलिस को उम्मीद है कि वकीलों के बयानों से इस बारे में जानकारी मिल सकती है।