कानपुर के कल्याणपुर आवास विकास में रहने वाले अजीत सिंह राष्ट्रीय राइफल (आरआर) में सिपाही थे। कारगिल युद्ध के दौरान उन्हें असम से बुलाकर कुपवाड़ा भेजा गया था। जब ऊंची बर्फीली पहाड़ियों पर छिपा बैठा दुश्मन हैंडग्रेनेड से हमला कर रहा था, तब वे भी मुस्तैदी से मुुंह तोड़ जवाब दे रहे थे।
बताते हैं इसी बीच दुश्मन का एक हैंडग्रेनेड उनके पास आकर गिरा। साथियों को बचाने में अपनी जान की परवाह किए बगैर हैंडग्रेनेड उठाकर फेंका तो वो फट गया, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। दर्जनों ऑपरेशनों के बाद अजीत की जिंदगी बच पाई थी लेकिन हौसला आज भी उनका आसमान पर है।
वे अपने दोनों बेटों को सेना में बड़ा अफसर बनाना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि बड़े बेटे देवराज ने एनडीए की प्रवेश परीक्षा दी है। रिजल्ट आना है। छोटा बेटा शिवराज 11वीं में पढ़ाई कर रहा है। वह एयरफोर्स में जाना चाहता है और उसने तैयारी भी शुरू कर दी है।
उन्होंने बताया कि उनके पिता छठि प्रसाद सिंह भी सेना में थे। बड़े भाई अमर सिंह भी फौज में थे। अब वो रेलवे में चीफ कू् कंट्रोलर हैं, जबकि छोटा भाई गिरीश सिंह एयरफोर्स में सार्जेंट था। उनका पूरा परिवार देश सेवा में लगा रहा है।