इसके ग्राउंड फ्लोर में एक कंपनी का डिपार्टमेंटल स्टोर चल रहा है, जबकि ऊपर की चारों मंजिलों में चार - चार फ्लैट बने हैं। केडीए की मिलीभगत से बनी इस बिल्डिंग में लोग रह रहे हैं। बिल्डर अब्दुल रहमान ने यह इमारत निजी आराजी संख्या -1055 में होने का दावा किया था।
वहीं, डीएम के आदेश पर चल रही जांच में यह तय हो गया है कि यह अवैध निर्माण इस आराजी में नहीं है। आराजी संख्या - 1077 या 1078 में होने के संकेत दिए गए, पर पांच दिन से यह तय नहीं हो पाया। जांच में शामिल एक अधिकारी ने 18 जुलाई को इस संबंध में निर्णय होने के संकेत दिए हैं।