हयात की ओर से अधिवक्ता शकील अहमद बुंधेल ने तर्क रखा कि जिन बातों को लेकर पुलिस रिमांड चाहती है। उससे संबंधित कोई भी साक्ष्य या दस्तावेज कोर्ट में पेश नहीं किए जा रहे हैं। पुलिस ऐसा कोई भी फुटेज पेश नहीं कर सकी है, जिससे यह साबित हो कि हयात घटना के दिन जुलूस का नेतृत्व कर रहा था।
वहीं, जो पोस्टर चिपकाए गए थे उसमें भी यह स्पष्ट लिखा था कि कोई भी दुकान जबरन बंद नहीं कराई जाएगी। गैर मजहबी भाइयों पर बंदी का दबाव नहीं डाला जाएगा। कोई धरना प्रदर्शन नहीं किया जाएगा। शांतिपूर्ण बंदी की बात कही गई थी। हयात को गलत आरोप लगाकर झूठा फंसाया जा रहा है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने हयात समेत चारों आरोपियों का तीन दिन का पुलिस रिमांड स्वीकार कर लिया है।