केस-1
मालरोड स्थित शहर के प्रमुख सरकारी बैंक में सुबह शाखा खुलने के बाद रोहित तिवारी (बदला नाम) दो हजार के नोट की छह से सात गड्डी लेकर आए थे। एक गड्डी में 20 लाख रुपये थे। पैसे उन्होंने अपने खाते में जमा किए।
केस- 2
महेश जायसवाल ने बताया कि वह कानपुर में रहकर निजी संस्थान में काम करते हैं। उनका परिवार रायबरेली में है। सुबह बैंक ऑफ बड़ौदा की एक शाखा में आठ हजार रुपये जमा करने गए थे। इसमें से दो-दो हजार के दो नोट थे पर बैंक कर्मी ने जमा करने से मना कर दिया।
आरबीआई के नियम से ऊपर बैंक ऑफ बड़ौदा
सूत्रों ने बताया कि बैंक ऑफ बड़ौदा के शीर्ष अधिकारी ने शनिवार सभी शाखाओं के प्रबंधकों के साथ वीडियो कॉल पर ऑनलाइन बैठक कर निर्देश दिए गए कि कोई शाखा दो हजार के नोट नहीं जमा करेगा। इसके बाद शहर की अलग-अलग शाखाओं में दो हजार के नोट नहीं जमा किए गए। विनोबानगर और बर्रा की शाखा के ग्राहकों ने बताया कि उनको रुपये जमा किए बगैर लौटा दिया गया। दोपहर बाद लखनऊ मंडल में ग्राहकों ने इसकी शिकायत की तो कुछ शाखाओं में दो हजार के नोट स्वीकार किए गए।
थोक बाजारों में रहा सन्नाटा
आरबीआई की घोषणा के बाद शनिवार को सराफा को छोड़कर अन्य थोक बाजारों में सन्नाटा देखने को मिला। कारोबारियों ने बताया कि उधारी की रकम का आरटीजीएस और नेफ्ट के जरिये भुगतान किया जा रहा है जबकि नकद में दो हजार के नोट से भुगतान करने को ग्राहक कह रहे हैं। इससे बाजार में सौदे नहीं हो रहे हैं।