वहीं, रविवार को शासन से आई दो सदस्यीय टीम मुख्य वन संरक्षक पश्चिमी एसएन मिश्रा और मनोज सोनकर (वन संरक्षक) को भी कई खामियां मिलीं। टीम ने करीब 5 घंटे की पड़ताल में पाया कि बाल ट्रेन के प्लेटफार्म पर जिस जगह हादसा हुआ था वहां लगा कैमरा खराब था। इसपर जू निदेशक केके सिंह ने टीम को बताया कि एक माह पहले ही गिलहरी ने तार काट दिए थे।
इस कारण टीम को घटना से संबंधित फुटेज नहीं मिल पाए। टीम ने प्लेटफार्म पर कैंटीन संचालक और तीन विभागीय कर्मचारियों के बयान भी लिए। पुलिस ने ट्रेन ड्राइवर की दक्षता पर भी सवाल उठाए। पुलिस ने ट्रेन ड्राइवर करन से सवाल पूछा कि उसकी शिक्षा कहां तक है? उसने कहा मैकेनिकल इंजीनियरिंग। क्या उसे कोई ट्रेन चलाने का अनुभव है? तो वह चुप्पी साध गया। एसीपी कर्नलगंज मोहम्मद अकमल खान ने बताया कि रविवार देर शाम तक पुलिस तहरीर का इंतजार करती रही, लेकिन परिजन थाने नहीं पहुंचे।
2016 के हादसे से नहीं लिया सबक
बाल ट्रेन का 2.8 किलोमीटर का ट्रैक वर्ष 2015 में करीब 1 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करके बनाया गया था। वर्ष 2016 में चिम्पैंजी बाड़े के सामने दो बोगी और इंजन पलट गए थे। बता दें कुछ साल पहले जू प्रशासन ने बस के पुर्जों से बाल ट्रेन का इंजन बनवाया था। इसमें करीब 2.50 लाख रुपये खर्च किए गए थे। इससे पहले ट्रेन बैट्री से चलती थी।
दो सदस्यीय टीम आई थी उन्होंने अपने स्तर से जांच की है। शासन को रिपोर्ट सौंपेंगे। उसी के आधार पर कार्रवाई होगी। अभी मुझे कोई दोषी नहीं समझ में आया जिससे अपने स्तर से कार्रवाई करता। - केके सिंह, चिड़ियाघर निदेशक
शिक्षिका की टूट गईं थीं पसलियां, लगे थे 21 घाव
रामादेवी के सफीपुर निवासी शिक्षिका अंजू शर्मा का रविवार को पोस्टमार्टम हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक उनके शरीर में 21 गंभीर घाव हुए थे। उनकी पसलियां टूटकर अंदरूनी अंगों में घुस गईं थीं जिसकी वजह से शरीर के अंदर खून भर गया था। अधिक खून बहने से मौत हो गई थी।
लगाए गए चेतावनी संकेतक
हादसे के बाद रविवार को जू प्रशासन भी जागा और प्लेटफार्म पर चेतावनी संकेतक लगाए। जिसमें लिखा था सावधान, चलती ट्रेन में चढ़ने का प्रयास न करें। रविवार को 5447 दर्शक घूमने पहुंचे। हर कोई प्लेटफार्म पर खड़ी ट्रेन को देखने पहुंच रहा था।