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कानपुर: आईआईटी का सर्वे, 60 प्रतिशत प्रदूषण की वजह खराब सड़कें, दीपावली से पहले रेड जोन में शहर

Tue, 02 Nov 2021 09:10 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

कानपुर आईआईटी का मानना है कि शहर के खराब प्रदूषण की 60% वजह सड़कों से उड़ने वाली धूल है। दीपावली की खरीदारी के लिए कुछ दिनों से लगातार बाजारों में ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है।
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कानपुर में प्रदूषण - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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दीपावली से तीन दिन पहले ही शहर में प्रदूषण का स्तर रेड जोन में आ गया है। बाजार में बढ़ रही वाहनों की भीड़, भीषण जाम और खराब सड़कों से उड़ती धूल के कारण एक दिन में ही एक्यूआई ने 100 की उछाल मारी है। मंगलवार को शहर के बीच ब्रह्मनगर में स्थापित प्रदूषण मापक यंत्र में इस साल का सर्वाधिक एक्यूआई 408 दर्ज हुआ।
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यह स्वस्थ शरीर के लिए भी खतरे की घंटी है। दिवाली पर जब पटाखे फूटेंगे तो और भी स्थित खराब होगी। हालांकि आईआईटी का मानना है कि शहर के खराब प्रदूषण की 60% वजह सड़कों से उड़ने वाली धूल है। दीपावली की खरीदारी के लिए कुछ दिनों से लगातार बाजारों में ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है। जाम में फंसने के कारण वाहन घंटों धुआं उगल रहे हैं। धूल धुएं के मिश्रण से प्रदूषण का स्तर भी बढ़ने लगा है।

मेट्रो निर्माण के कारण हुई खुदाई और खराब सड़कों से उड़ रही धूल ने और स्थिति बिगाड़ दी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से जारी रिपोर्ट के अनुसार नेहरू नगर क्षेत्र में रात आठ बजे एक्यूआई 408, किदवई नगर क्षेत्र में 262, कल्याणपुर एनएसआई में 218 और आईआईटी कल्याणपुर में 203 पहुंच गया। नेहरू नगर का एक दिन पहले 300 एक्यूआई था। एक दिन में रेड जोन (400) में आ गया, जबकि प्रदूषण की सामान्य स्थिति 50 एक्यूआई है।
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पटाखों का प्रदूषण कुछ दिन का, खराब सड़कें मुख्य कारण
दीपावली पर पटाखों की वजह से भले ही एक दो दिन तक शहर में प्रदूषण की मात्रा अधिक हो लेकिन पूरे 12 महीने प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह शहर की खराब सड़कें हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर की तरफ से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दी गई रिपोर्ट में महानगर में प्रदूषण की खराब स्थिति के लिए सड़कों की हालत को सबसे ज्यादा दोषी बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि शहर में प्रदूषण की 60% वजह सड़कों से उड़ने वाली धूल है।

15% सड़कों पर चलने वाले वाहनों से निकलने वाले धुएं से प्रदूषण फैल रहा है। 25% प्रदूषण औद्योगिक धुएं और शहर में जलाए जाने वाले कचरे से फैल रहा है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से प्रदेश के सबसे ज्यादा प्रदूषित 14 शहरों का सर्वे आईआईटी कानपुर के माध्यम से कराया गया है। जिसमें प्रदूषण के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार सड़कों से उड़ने वाली धूल को बताया गया है।
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औद्योगिक से ज्यादा शहरी क्षेत्रों में प्रदूषण
पिछले काफी समय से महानगर के औद्योगिक क्षेत्रों को प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण माना जाता रहा है लेकिन आईआईटी की रिपोर्ट आने के बाद नया खुलासा हुआ है। यही वजह है कि बोर्ड की तरफ से पिछले 2 साल के अंदर शहरी क्षेत्रों में ही प्रदूषण मापक मॉनिटर स्थापित किए गए हैं, जबकि औद्योगिक क्षेत्रों में अभी तक कोई भी स्वचालित प्रदूषण मापक मॉनिटर स्थापित नहीं किया गया है।

बोर्ड का मानना है कि औद्योगिक क्षेत्र से ज्यादा शहरी क्षेत्रों में प्रदूषण फैल रहा है। इसलिए उसको नियंत्रण करने के लिए और लगातार जानकारी देने के लिए कल्याणपुर एनएसआई, आईआईटी कल्याणपुर, किदवई नगर और नेहरू नगर में प्रदूषण मापक मॉनिटर स्थापित किए गए हैं।

नगर निगम की फॉगिंग गाड़ियां खड़ीं
प्रदूषण को कम करने में सहायक नगर निगम के फॉगिंग वाहन कई दिनों से खड़े ही हैं। शहर की खराब सड़कों से उड़ रही धूल नगर निगम के अफसरों को दिख ही नहीं रही है। इन वाहनों की लगातार फॉगिंग से प्रदूषण का स्तर में कमी पहले भी देखी जा चुकी है।

आईआईटी कानपुर की रिपोर्ट के बाद बोर्ड की तरफ से सड़कों के लिए जिम्मेदार विभागों को भी गाइडलाइन भेजी गई है और समय-समय पर इसमें सुधार के लिए भी जिलाधिकारी के माध्यम से दिशा निर्देश जारी किए जाते रहते हैं।
अनिल माथुर क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
 

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