कानपुर में शिवाला बंगाली मोहाल स्थित प्राचीन काली मंदिर में दिवाली की रात दी जा रही पशु (बकरों) की बलि के विरोध में भीड़ ने महिला पशु प्रेमियों से धक्का-मुक्की कर दी। उन्हें धक्के मारकर परिसर से बाहर निकाल दिया। फिर पशुओं की बलि जारी रखी।
पीड़ितों ने कोतवाली थाने में अज्ञात के खिलाफ छेड़छाड़ व पशु क्रूरता अधिनियम की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई है। मंदिर प्रबंधन ने इसे साजिश करार दिया है। मेनका गांधी के एनजीओ पीपुल्स फॉर एनीमल की कल्याणपुर निवासी पदाधिकारी ने पुलिस को बताया कि मंदिर में दिवाली की आधी रात को पूजा पाठ के बाद करीब एक दर्जन बकरों की बलि दी जाती है।
वह बलि रोकने के लिए साथियों संग मदिर परिसर में पहुंच गईं और बलि का विरोध दर्ज कराया तो मंदिर के पुजारी, कर्मचारियों और आयोजकों ने धक्का मुक्की शुरू कर दी। हंगामे की सूचना पर पहुंची पुलिस महिलाओं को भीड़ से बचा कर निकाल लाई।
पीड़िता का आरोप है कि उनके सामने तीन पशुओं की बलि दी गई थी। पुलिस ने इसके बाद भी बलि नहीं रुकवाई। वह बलि से पहले कोतवाली में मदद मांगने गईं थीं लेकिन कोई अफसर नहीं मिला था।