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Kanpur: गर्मी की छुट्टी में स्पेशल ट्रेनों में नहीं मिल रही जगह, बाथरूम में बैठकर जा रहे यात्री

Mon, 29 May 2023 10:42 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

गर्मी की छुट्टी में यात्रियों की संख्या में कई गुना इजाफा हुआ है। स्पेशल ट्रेनों में जगह नहीं मिल रही है। लंबी वेटिंग से यात्रियों की परेशानी बढ़ रही है। काउंटर टिकट से सीमा से ज्यादा वेटिंग टिकट बुक हो रहे हैं।
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यात्रियों की भीड़ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इस समय ट्रेनों में सफर करना बेहद मुसीबत भरा काम है। गर्मी की छुट्टियों की वजह से सभी ट्रेनें फुल चल रही हैं। स्पेशल ट्रेनों में भी जगह नहीं बची है। सीटों के मुकाबले 40 प्रतिशत टिकट वेटिंग के बुक हो रहे हैं, कन्फर्म टिकट महज पांच प्रतिशत ही कन्फर्म हो रहे हैं। वह भी तब जब कोई अपनी टिकट निरस्त कराता है।

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वहीं तत्काल कोटे की सीटों के लिए कानपुर सेंट्रल, गोविंदपुरी, अनवरगंज, रावतपुर, पनकी, कल्याणपुर के रिजर्वेशन काउंटरों पर लंबी लाइन लग रही है। आरक्षित कोच में वेटिंग टिकटधारक चल रहे हैं। इससे रिजर्वेशन करा चुके यात्रियों को भी परेशानी हो रही है। सबसे बुरा हाल जनरल कोच का है। यात्री टॉयलेट से लेकर सामान रखने वाली दो बर्थ के बीच में चादर को बांधकर बैठ रहे हैं।

टॉयलेट में बैठकर यात्रा कर रहे लोग
कानपुर सेंट्रल से गोरखपुर से कोचुवेली जा रही राप्तीसागर एक्सप्रेस प्लेटफार्म नंबर दो पर दोपहर 1:10 बजे कानपुर सेंट्रल आई। इसके जनरल कोच में यात्री टॉयलेट में बैठे नजर आए। एक पर एक लदे यात्रियों को खड़े होने तक की जगह नहीं मिली। कोच में जो एक बार चढ़ गया तो उतर नहीं सका। सेंट्रल स्टेशन पर तो कोई यात्री जनरल कोच के अंदर जा ही नहीं सका। बिहार और पूर्वी यूपी की तरफ से दिल्ली, मुंबई, दक्षिण भारत जाने वाले सभी सभी ट्रेनों में कमोबेश यही हालात रही।

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स्लीपर कोच में ज्यादा वेंटिंग टिकट हो रहीं बुक
स्लीपर कोच में सीमा से ज्यादा वेटिंग टिकट रेलवे बुक कर रहा है। अमूमन लंबी दूरी की 12 स्लीपर कोच वाली ट्रेन में 72 सीट के हिसाब से 864 सीट होती हैं। आम दिनों में ढाई-तीन सौ वेटिंग लिस्ट होती है। त्योहारों और मौजूदा समय में वेटिंग लिस्ट 350 तक पहुंच रही है। जो कुल सीट क्षमता की करीब 40 फीसदी ज्यादा है। इनमें से 4-5 प्रतिशत वेटिंग टिकट निरस्त कराने के बदले कन्फर्म हो रहे हैं।
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वेटिंग टिकट निरस्त कराने से रेलवे को भारी कमाई
पांच प्रतिशत वेटिंग टिकट कन्फर्म होने के बाद 35 प्रतिशत टिकट वेटिंग रह जाते हैं। ऐसे में यात्रियों के पास दो विकल्प होते हैं या तो वह टिकट निरस्त कराए या वेटिंग टिकट पर भारी भीड़ के बीच सफर करे। रेलवे काउंटर से कराए वेटिंग टिकट से यात्रा कर सकते हैं। ऑनलाइन बुक वेटिंग टिकट खुद निरस्त हो जाता है। रेलवे बोर्ड ने मई 2021 में वेटिंग टिकट बुक करने की सीमा तय की थी। इसके तहत स्लीपर क्लास के लिए अधिकतम 200, थर्ड एसी के लिए 100 सेकेंड एसी के लिए 50 और फर्स्ट एसी के लिए 20 से अधिक वेटिंग टिकट नहीं बुक हो सकते हैं। स्पेशल ट्रेनों में 300 तक वेटिंग टिकट की सीमा है। रेलवे के टिकट काउंटरों से सीमा से दो गुना वेटिंग टिकट बुक हो रहे हैं। चार्ट बनने के पर ट्रेन छूटने के आधे घंटे पहले आरएसी और वेटिंग टिकट निरस्त कराने पर स्लीपर श्रेणी में 60 रुपये शुल्क लगता है। एसी का टिकट रद्द कराने पर 65 रुपये कटते हैं। इस शुल्क से ही रेलवे को भरपूर कमाई हो रही है।

गर्मी की छुटि्टयों की वजह से यात्री बढ़े हैं। नियमित ट्रेनों में जगह न होने से रेलवे ने हर प्रमुख शहर के लिए स्पेशल ट्रेनें चलाई हैं। वेटिंग टिकट एक सुविधा है, जिससे निरस्त टिकट से दूसरों को सीट मिल सके। वाणिज्यिक विभाग की टीम नियमों के मुताबिक टिकटों की बुकिंग की निगरानी कर रही है।- हिमांशु शेखर उपाध्याय, सीपीआरओ, उत्तर मध्य रेलवे

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