कानपुर हैलट में नवजात के लिए मिल्क बैंक खुलेगा। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्रस्ताव को शासन ने मंजूरी दे दी है। इससे उन बच्चों को दूध पीने को मिल जाएगा, जिनकी मां का निधन हो गया हो या मां को ऐसी बीमारी है, जिससे उनका दूध नहीं दिया जा सकता।
कुछ माताओं को दूध न उतरनेे की भी दिक्कत होती है। उनके बच्चों को भी दूध मिल जाएगा। जिन माताओं को अधिक दूध होता है या जिनके बच्चे बीमारी के कारण नहीं रहते, वे मिल्क बैंक के नवजातों को दुग्ध दान कर सकती हैं। मिल्क बैंक शुरू होने में छह महीने लग सकते हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज प्रदेश का पहला राजकीय मेडिकल कॉलेज होगा जहां मिल्क बैंक खुल रहा है।
कॉलेज के स्त्री रोग और बालरोग विभाग ने यह प्रस्ताव तैयार किया था। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने शासन को भेजा। प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। मिल्क बैंक में संसाधन इकट्ठे करने के लिए 88 लाख रुपये बजट मिलेगा।
मिल्क बैंक मैटरनिटी विंग के प्रथम तल पर बनाया जा रहा है। इसमें फ्रीज, डीप फ्रीजर, वायरल एनालाइजर तथा अन्य उपकरण रहेंगे। दूध की जांच की जाएगी, जिससे किसी प्रकार का संक्रमण न रहे। इसके बाद इसे फ्रीजर में सुरक्षित कर लिया जाएगा। जरूरतमंद बच्चे को दिया जाएगा।
स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. किरन पांडेय और बालरोग विभागाध्यक्ष डॉ. यशवंत राव ने बताया कि एनआईसीयू में भर्ती होने वाले बच्चों को मां का दूध न मिलने की दिक्कत होती है। कई बच्चों की मां बीमार होती है, उसका दूध नहीं पिलाया जा सकता। उसे मिल्क बैंक से दूध मिल जाएगा। माताएं रक्तदान की तर्ज पर बच्चों को दुग्ध दान कर सकती हैं। इससे बहुत से नवजात बच्चों को मां का दूध मिल जाएगा।