गर्मी की बीमारियां सिर उठाए हैं। उल्टी-दस्त, डायरिया, गैस्ट्रोइंटाइटिस, टायफॉयड वायरल फीवर के रोगियों की संख्या बढ़ रही है। इसके साथ ही समर डायरिया का प्रकोप है। खासतौर पर छोटे बच्चे डायरिया की चपेट में आ रहे हैं। इसके अलावा पुराने रोगियों की हालत डायरिया के बाद बिगड़ जा रही है।
डायरिया फैलाने वाले रोटा वायरस के साथ ही अन्य मौसमी वायरस सक्रिय हैं, जिनसे निमोनिया हो रहा है। रविवार को डायरिया से दो बच्चों और निमोनिया से दो मौत हो गई हैं। नेशनल शिशु फोरम के अध्यक्ष डॉ. जेके गुप्ता ने बताया कि डायरिया के साथ वायरल फीवर के रोगी बढ़े हैं।
बोतल से दूध पीने वाले बच्चों को अधिक दिक्कत है। बोतल ढंग से साफ न करने पर संक्रमण हो रहा है। मां का दूध पीने वाले बच्चे कम बीमार पड़ रहे हैं। इसके अलावा हैलट में डायरिया के बाद गुर्दा रोग की चपेट में आए रोगियों का इलाज चल रहा है। फजलगंज के राघव के डेढ़ साल के बच्चे की डायरिया के बाद मौत हो गई।
इसके साथ ही जरीब चौकी के जावेद के दो साल के बेटे की डायरिया से मौत हुई है। दोनों बच्चों को हैलट रेफर किया गया था। इसके अलावा ग्वालटोली के रहने वाले संत कुमार (56) की निमोनिया से मौत हो गई। वे अस्थमा रोगी रहे हैं, उनका चेस्ट हॉस्पिटल से इलाज चल रहा था। नौबस्ता के राजकिशोर (50) की क्षेत्र के एक अस्पताल में निमोनिया से मौत हुई है। वह पोस्ट कोविड रोगी रहे हैं। उनके फेफड़ों में फाइब्रोसिस हो गई थी।