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हेड कांस्टेबल का फर्जीवाड़ा: दयाशंकर का काला इतिहास, पैसे लेकर छोड़े थे तस्कर, अवैध खनन में थी मिलीभगत

Fri, 11 Feb 2022 05:19 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

दयाशंकर सिंह अब तक तीन बार निलंबित हो चुका है। वर्ष 1992 में फतेहगढ़ में निलंबित हुआ था। बर्रा में तैनाती के दौरान 2014 में जब उस पर रिश्वतखोरी का मुकदमा दर्ज हुआ था तब उसको निलंबित किया गया था।
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दयाशंकर वर्मा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी पुलिस के पुलिसकर्मी दयाशंकर वर्मा का एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। दयाशंकर वर्मा हेड कांस्टेबल है लेकिन पिछले चार साल से दरोगा के पद पर नौकरी कर रहा है और इस पद की सैलरी भी उठा रहा है। यही नहीं दरोगा स्तर के करीब 150 मामलों की विवेचनाएं भी कर डालीं।
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इसमें पुलिस विभाग के अफसरों व बाबुओं की भी मिलीभगत की आशंका है। विवादित हेड कांस्टेबल दयाशंकर का इतिहास ही काला रहा है। पैसे लेकर मादक पदार्थ की तस्करी करने वाले को छोड़ने से लेकर अवैध खनन तक में उसकी भूमिका पाई गई थी।

इसलिए उसके खिलाफ कई बार विभागीय कार्रवाई की गई। निलंबन के साथ कई बार दंड भी मिला। यही वजह है कि उसकी सर्विस बुक दागदार है। वह कई जिलों में तैनात रह चुका है। वर्ष 1993 में दयाशंकर की तैनाती फतेहगढ़ जिले में थी।
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उसके क्षेत्र में डकैती पड़ी थी। बदमाशों ने फायरिंग की थी लेकिन वह जवाब न देकर वहां से भाग गया था। इस मामले में विभागीय कार्रवाई करते हुए अफसरों ने उसको न्यूनतम वेतन मान पर कर दिया था। वर्ष 2006 में दयाशंकर की तैनाती बाराबंकी में थे।

मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले आरोपी शकील को दयाशंकर ने पकड़ा था। मादक पदार्थ भी बरामद किया था। पैसे लेकर शकील को छोड़ दिया था। इसमें उसको मिस कंडक्ट मिलने के साथ सत्य निष्ठा रोकी गई थी।

वहीं 2006 में हमीरपुर में बंदी से सांठगांठ करने पर मिस कंडक्ट मिली थी। इसी तरह से 2009 में झांसी में तैनाती के दौरान उसकी संलिप्तता अवैध खनन में पाई गई थी, तब भी सत्य निष्ठा रोकी गई थी। यानी सर्विस बुक पर बैड इंट्री की गई थी।

तीन बार निलंबित हुआ
दयाशंकर सिंह अब तक तीन बार निलंबित हो चुका है। वर्ष 1992 में फतेहगढ़ में निलंबित हुआ था। बर्रा में तैनाती के दौरान 2014 में जब उस पर रिश्वतखोरी का मुकदमा दर्ज हुआ था तब उसको निलंबित किया गया था।
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वहीं एक महीने पहले जब उसने प्रेसवार्ता करने का एलान किया था, तब निलंबित कर दिया गया था। हालांकि दस दिन के भीतर उसको बहाल कर दिया गया।

अफसर आएंगे रडार पर 
पूरे मामले में जितना दोषी दयाशंकर वर्मा हैं, उससे कम दोषी विभागीय जिम्मेदार भी नहीं हैं। दयाशंकर का कहना है कि उसने कई जांच अधिकारियों को अपने बयान में एचसीपी बताया लेकिन उसकी तैनाती बतौर दरोगा की गई। इस तरह से इस खेल में शामिल अफसर भी रडार पर आएंगे। 
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