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छावनी विधानसभा सीट: इस बार जुदा है हाल, पांच मुस्लिम प्रत्याशी ठोक रहे ताल

Fri, 11 Feb 2022 03:44 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social Media
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कानपुर नगर की सभी 10 विधानसभा सीटों में सबसे ज्यादा रोचक मुकाबला छावनी विधानसभा सीट पर होने वाला है। दरअसल, मुस्लिम बहुल मतदाता वाली इस सीट पर सबसे ज्यादा पांच प्रत्याशी मुस्लिम बिरादरी से ही हैं। ऐसे में निर्णायक स्थिति पर बैठे मुस्लिम मतदाताओं के सामने बड़ी ऊहापोह की स्थिति बनने वाली है।
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दावेदारों में भी इन मतों को अपनी झोली में गिराने की बड़ी चुनौती होगी। पिछले चुनाव में सपा-कांग्रेस के गठबंधन से उतरे कांग्रेसी नेता सोहिल अख्तर अंसारी ने जीत हासिल की थी। इस बार भी वे कांग्रेस के टिकट से मैदान में हैं। हालांकि इस बार समीकरण बहुत जुदा हैं।

सपा, बसपा, एआईएमआईएम और आम आदमी पार्टी ने भी मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट दिया है। ऐसा पहली बार है कि किसी विधानसभा सीट पर मुस्लिम वर्ग से ताल्लुक रखने वाले इतनी अधिक संख्या में प्रत्याशी मैदान में हैं।
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भाजपा जहां अपने पुरानी सीट को फिर से पाना चाहती है तो कांग्रेस इस फिराक में है कि इस बार वह समाजवादी पार्टी के सहयोग के बगैर अपना सिक्का जमाए। कैंट ऐसा क्षेत्र है, जहां पर छावनी बोर्ड ओर नगर निगम दोनों की हिस्सेदारी है। इन दोनों के जरिये इस पूरे क्षेत्र का विकास कार्य होता है।

इस सीट पर सपा ने कभी नहीं चखा जीत का स्वाद
1967 में हुए प्रदेश के चौथे विधानसभा चुनाव के दौरान अस्तित्व में आई कैंट विधानसभा सीट पर आज तक समाजवादी पार्टी का खाता नहीं खुला है। इस सीट पर भाजपा के सतीश महाना 1991 से लेकर 2007 तक पांच बार विधायक चुने गए। इससे पहले यहां तीन बार कांग्रेस, एक बार जनता दल और एक बार जनता पार्टी का प्रत्याशी विधायक चुना गया। 2012 में सीट का बंटवारा होने के बाद यहां के समीकरण बदले लेकिन भाजपा के ही रघुनंदन सिंह भदौरिया ने बाजी मार ली। 2017 के चुनाव में भाजपा यहां पर सपा और कांग्रेस के गठबंधन में फंस गई और सोहिल अंसारी आगे निकल गए। 

विधानसभा क्षेत्र के मुद्दे 
- शुक्लागंज, सर्किट हाउस, जाजमऊ और लखनऊ को जोड़ने वाला कैंट पुल पिछले छह साल से बन रहा है, अभी तक पूरा नहीं। डेडलाइन कई बार बदली जा चुकी है। 
- क्षेत्र के नाले सीधे गंगा में गिर रहे हैं। कई बाद आदेश के बावजूद सुधार नहीं है। विशेष रूप से गोला घाट और डबका नाले का प्रदूषित पानी गंगा में गिरने से नहीं रोका जा सका। 
- गंदगी की समस्या बनी रहती है। रविवार के दिन सफाई नहीं होती। पीने के पानी की आपूर्ति की किल्लत भी बनी हुई है।
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कैंट क्षेत्र की पहचान
सैन्य क्षेत्र, डीएमएसआरडी, सीओडी, पैराशूट फैक्ट्री, आयुध उपस्कर निर्माणी, ऑल सोल्स चर्च, सबसे पुराना क्लब कानपुर क्लब, गोल्फ कोर्स, सबसे पुराने और बड़े औद्योगिक घराने जेके ग्रुप का आवास।

कुल मतदाता - 359037
महिला मतदाता- 162112
पुरुष मतदाता- 196885

जातीयगत आंकडे़ 
मुस्लिम मतदाता : 125200 
दलित : 87100
सवर्ण : 64500 
पिछड़ा : 49900
अन्य 25000
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