कानपुर नगर निगम में एक फार्मासिस्ट ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे 38 साल विभाग में नौकरी की। ऑडिट टीम ने वर्ष 2015 में रिटायरमेंट से एक महीने पहले उसका फर्जीवाड़ा पकड़ा था। मामले में नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने छह साल बाद गुरुवार रात उसके खिलाफ बेकनगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई है।
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फिलहाल उसके रिटायरमेंट का भुगतान, पेंशन समेत अन्य लाभ रोक दिए गए हैं। नगर स्वास्थ्य अधिकारी अमित सिंह गौर ने बताया कि बेकनगंज निवासी मोहम्मद वसीक की 1977 में नगर निगम में फार्मासिस्ट (यूनानी) के पद पर नियुक्ति हुई थी।
रिटायरमेंट से ठीक एक महीने पहले 2015 में ऑडिट की जांच में खुलासा हुआ था कि वसीक ने यूनानी का फर्जी एजूकेशन सर्टिफिकेट लगाया था। इसके बाद विभाग ने पेंशन, पीएफ समेत अन्य रिटायरमेंट लाभ रोक दिए थे। अब वसीक के खिलाफ बेकनगंज थाने में धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेजों से नौकरी पाने समेत अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
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सूत्रों के अनुसार अफसरों की ट्रांसफर पोस्टिंग के दौरान फाइल सामने आने पर नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। बताते हैं कि नगर निगम में रसूख के चलते उसकी फाइल दबी रहती थी।