रामऔतार के परिजनो से घटना की जानकारी लेते सुरक्षा परिषद संगठन के लोग। संवाद
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राजपुर। मिशन सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने बेहमई गांव में हुए नरसंहार में मारे गए लोगों के परिजनों से गुरुवार को मुलाकात की। उनका हाल जाना और न्याय दिलाने का भरोसा दिया। कहा, कि हत्याकांड के चार दशक बीतने के बाद भी अदालत से फैसला न आना दुर्भाग्यपूर्ण है। देर रात परिषद के सदस्य कानपुर नगर भी पहुंचे।
14 फरवरी 1981 को यमुना नदी किनारे बसे बेहमई गांव में डकैत फूलन देवी ने साथियों के साथ मिलकर 20 लोगों को कतार में खड़ा कर गोलियों से भून दिया था। इसमें मारे गए राजपुर निवासी रामऔतार के परिजनों से मिलने गुरुवार को लखनऊ से मिशन सुरक्षा परिषद व हरियाणा के धानुक समाज के प्रदेश अध्यक्ष धर्मवीर डाबरा पहुंचे।
रमेश चंद्र कठेरिया ने बताया कि 14 फरवरी को बड़े भाई राम औतार सिकंदरा के नजीर खां के साथ मजदूरी करने गए थे। उसी दौरान फूलन देवी ने रामऔतार की गोली मारकर हत्या कर दी। कई बार राजनीतिक दलों के लोग घर आए और मदद का आश्वासन देकर चले गए। इस पर धर्मवीर डाबरा ने परिजनों को मदद का आश्वासन दिया।
कहा, कि हत्याकांड के चार दशक बीतने के बाद भी निचली अदालत से फैसला न आना दुर्भाग्यपूर्ण है। रामऔतार के परिजनों को न्याय दिलाने के लिए जल्द एससीएसटी आयोग के अध्यक्ष से मिलेंगे।
मिशन सुरक्षा परिषद लखनऊ की जिलाध्यक्ष पूजा गौतम व उपाध्यक्ष विशाल आनंद गिहार ने कहा कि पीड़ित परिवारों को सरकारी सुविधाएं दिलाने के लिए पहल की जाएगी। संगठन के सदस्यों ने कई और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। इस मौके पर विनोद प्रताप सिंह, रामबली बाबा समेत संगठन के कई लोग मौजूद रहे।