लोकतंत्र सेनानी अशर्फीलाल त्रिपाठी का फाइल फोटो। (संवाद)
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झींझक (कानपुर देहात)। कस्बा निवासी लोकतंत्र सेनानी का शुक्रवार की रात निधन हो गया। उनके पैतृक गांव खमहैला में शव का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान काफी संख्या में पहुंचे लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
मूलरूप से खमहैला गांव निवासी और वर्तमान में शंकरगंज झींझक में रह रहे लोकतंत्र सेनानी अशर्फीलाल त्रिपाठी (85) काफी समय से बीमार चल रहे थे। कानपुर के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था।
जहां शुक्रवार की रात उनका निधन हो गया। शनिवार को कस्बा स्थित आवास पर पार्थिव शरीर लाया गया। जहां चौकी प्रभारी झींझक देवनरायण द्विवेदी, लेखपाल हरिश्चंद्र समेत बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
बाद में पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव खमहैला लाया गया। यहां शव का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान पुत्र संतोष त्रिपाठी, अजय व गुड्डन समेत अन्य लोगों की आंख नम रही।
साथी लोकतंत्र सेनानी शिवशंकर मिश्रा ने बताया कि अशर्फीलाल त्रिपाठी इमरजेंसी के समय चार माह तक जेल में रहे थे। उन्होंने गरीबों की सेवा के लिए हमेशा संघर्ष किया।