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कानपुर देहात : 34 सौ रुपये गबन में अमीन को पांच साल की कैद, 1999 में दर्ज हुई थी रिपोर्ट

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कानपुर देहात। अकबरपुर तहसील में तैनात रहे अमीन को 34 सौ रुपये गबन के मामले में गुरुवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पांच साल की कैद व पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर अभियुक्त को एक माह का अतिरिक्त कारावास काटना होगा। सेवाएं समाप्त होने के बाद भी अमीन बारा गांव में गलत तरीके से वसूली कर रहा था।
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अकबरपुर तहसील में तैनात रहे नायब तहसीलदार गजनेर सुनील कुमार झा ने 11 मई 1999 को अकबरपुर निवासी फसली अमीन अब्दुल हफीज पर 34 सौ रुपये गबन की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शिवानंद की कोर्ट में चल रही थी।
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि फसली अमीन के रूप में भर्ती किए गए अब्दुल हफीज ने वसूली गई रकम कोषागार में जमा नहीं की। साथ ही अभिलेखों में हेराफेरी कर किसानों को फर्जी रसीदें दी। सरकारी अभिलेख जमा नहीं किए।
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सेवाएं समाप्त होने के बाद भी वह गलत तरीके से बारा गांव में वसूली करते रहे। कोर्ट ने गुरुवार को अमीन को दोषी मानते हुए पांच वर्ष की कैद व पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अभियोजन अधिकारी जान्हवी कुमार पांडेय ने बताया कि अर्थदंड अदा न करने पर अभियुक्त को एक माह का अतिरिक्त कारावास काटना होगा।
किशोर न्याय बोर्ड ने प्रधानाचार्य को जारी किया वारंट
कानपुर देहात। किशोर न्याय बोर्ड ने गांधी इंटर कॉलेज नोनारी के प्रधानाचार्य को वारंट जारी किया है। उन्हें कोर्ट ने दो छात्रों की उम्र प्रमाणित करने के लिए तलब किया था। इसके बावजूद वह गुरुवार को हाजिर नहीं हुए।
अधिवक्ता महेश यादव ने बताया कि तीस साल पहले डेरापुर के मदनापुर गांव में सिर्फ एक पेड़ के मालिकाना हक को लेकर दयाराम लोधी की हत्या हो गई थी। इसमें कोर्ट ने 1996 में प्यारेलाल और उसके बेटे लोकेंद्र व जागेंद्र को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ तीनों ने हाईकोर्ट में अपील की थी।
साथ ही घटना के वक्त दोनों भाइयों ने नाबालिग होने की बात कही। हाईकोर्ट के निर्देश पर किशोर न्याय बोर्ड में शैक्षिक अभिलेखों की जांच के लिए सुनवाई चल रही है। इस पर कोर्ट ने गांधी इंटर कॉलेज नोनारी के प्रधानाचार्य को उम्र प्रमाणित करने के लिए तलब किया था। इसके बावजूद वह गुरुवार को हाजिर नहीं हुए।
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