एसआईटी की जांच में सामने आया है कि जिन 1200 लोगों को पुलिस ने छोड़ा था उनमें से कई ने सिखों की हत्या की थी। पुलिस ने इन लोगों पर मामूली कार्रवाई करने के बाद छोड़ दिया था। एसआईटी की जांच में पता चला कि जो लोग छोड़े गए थे वही लोग हत्याकांड मेें शामिल रहे थे। तब पुलिस ने उन्हें लूट करने में दिखाया था, दंगों से कोई कनेक्शन नहीं दिखाया था।
एसआईटी की जांच में सामने आया है कि दंगों के दौरान सिखों की हत्या के साथ-साथ बड़े पैमाने पर लूट की गई थी। पुलिस ने लूटे गए माल के साथ करीब 1200 लोगों को पकड़ा था, मगर उनके खिलाफ मामूली कार्रवाई कर छोड़ दिया गया था। एसआईटी ने जब जांच की तो इन्हीं आरोपियों में कई सिखों के हत्यारे निकले।
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कानपुर में 127 सिखों की हत्या की गई थी। हत्या व डकैती की धाराओं में केस दर्ज किए गए थे। धीरे-धीरे केसों की विवेचना और खानापूरी कर अधिकतर केसों में फाइनल रिपोर्ट लगा उनको बंद कर दिया गया था। 11 केसों में चार्जशीट लगी थी लेकिन सुबूतों और गवाहों की कमी की वजह से आरोपी छूट गए थे। एसआईटी ने जांच की तो पता चला कि दंगों के बाद पुलिस ने करीब 12 सौ लोगों को पकड़ा था। बरामदगी की लिखापढ़ी कर मामला रफादफा कर दिया था। एसआईटी की जांच में पता चला कि जो लोग छोड़े गए थे वही लोग हत्याकांड मेें शामिल रहे थे। तब पुलिस ने उन्हें लूट करने में दिखाया था, दंगों से कोई कनेक्शन नहीं दिखाया था।