28 एनाउंसर प्रसारित करते थे कार्यक्रम
आकाशवाणी केंद्र में कुल 28 एनाउंसर नियुक्त हैं। इसमें केवल दो स्थायी उद्घोषक हैं, इन दोनों का दो महीने के अंतराल में रिटायरमेंट भी है। कार्यक्रम अधिकारी भी इस महीने की 30 तारीख को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। बाकी उद्घोषक आउटसोर्सिंग के जरिये रखे गए थे। उन्हें मैसेज के जरिये बता दिया गया कि अब आकाशवाणी केंद्र से प्रसारण नहीं होगा।
यहीं से होता रहा उप्र, उत्तराखंड के विज्ञापनों का प्रसारण
प्रदेश में विविध भारती के पांच सेंटर रहे हैं। कानपुर केंद्र इस बात के लिए भी जाना जाता है, कि यहां से पूरे उप्र और उत्तराखंड के विज्ञापन प्रसारित किए जाते रहे हैं।
पहले दो घंटे कर पाते थे प्रसारण
नवंबर 2021 से पहले सुबह 10 से 11 और शाम को छह से सात बजे तक कानपुर के तैयार प्रोग्राम प्रसारित किए जाते थे पर अब ऐसा नहीं है। अब केवल एफएम रेनबो का प्रसारण होता है। वह भी लाइव नहीं किया जाता है।
केंद्र पूरी तरह से बंद नहीं हुआ है। यहां से प्रसारित होने वाले कार्यक्रम पूरी तरह बंद हो गए हैं। वही कार्यक्रम इसकी पहचान थे। महोबा, उरई, इटावा और फतेहपुर सेंटर भी बंद होने के बाद वहां का स्टाफ कानपुर शिफ्ट किया गया है। - आरपी जाटव, कार्यक्रम अधिकारी
भूख हड़ताल पर बैठेंगे आकाशवाणी के उद्घोषक
आकाशवाणी के कानपुर केंद्र में कैजुअल अनाउंसर के पैनल को बंद करने के विरोध में आकाशवाणी उद्घोषक संगठन के बैनर तले कर्मचारियों ने धरना दिया। कर्मचारियों का कहना था कि सरकारी तंत्र के गलत फैसले की वजह से इसे बंद किया गया है। कहा कि केंद्र सरकार ने कानपुर रिले केंद्र के लिए जो कैजुअल एनाउंसर का पैनल बनाया था, उसे बंद कर दिया है। बेनाझाबर स्थित आकाशवाणी केंद्र के बाहर धरने के दौरान संगठन की अध्यक्ष मालिनी सक्सेना ने कहा कि रेडियो मनोरंजन का ही साधन नहीं बल्कि एक ऐसा प्रभावशाली माध्यम है जो जनमत निर्माण में सक्षम है। इसको षड्यंत्र से बंद किया जाना गलत है। उन्होंने कहा कि अगर कर्मचारियों की मांग को अनसुना किया गया तो सभी कर्मचारी इसी संस्थान के गेट पर भूख हड़ताल पर बैठेंगे। धरने में शिप्रा चंद्रा, सोनम मिश्र, मीनाक्षी तिवारी, कुमार गौरव, सौरभ त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
कार्यक्रमों का प्रसारण बंद हो जाने से कानपुर की विरासत और लोगों को इस शहर से जोड़ने को लेकर जो भी प्रयास किया जा रहा था, वह संभव नहीं हो पाएगा। एक झटके से इस तरह से इसे बंद किया जाना सही नहीं है।- मालिनी सक्सेना, उद्घोषिका
जो केंद्र 1965 से संचालित है, उसको विस्तार न देकर बंद किया जाना आश्चर्यजनक है। इसके लिए हम लोग लगातार अपनी बात अलग-अलग फोरम पर रख रहे हैं। ताकि कानपुर के लोगों के लिए यह आयोजन चलता रहे।- शिप्रा चंद्रा, उद्घोषिका
विविध भारती के कार्यक्रम शहरी क्षेत्र के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लोगों में भी काफी पसंद किए जा रहे थे, इसके बावजूद इसे बंद किया जाना समझ में नहीं आया।- सैयद फरहान, उद्घोषक