जांच में सामने आया कि जो संपत्तियां बैंक में बंधक रखी गईं, उसमें 91/146 हीरामन का पुरवा शत्रु संपत्ति घोषित है, जो कि सरकार की संपत्ति मानी जाती है। जिसे विक्रय या बंधक नहीं रखा जा सकता है। इसके अलावा दो अन्य संपत्तियां 99/14ए, बेकनगंज एवं 88/21 नाला रोड चमनगंज को भी शत्रु संपत्ति घोषित करने की प्रक्रिया वर्तमान में चल रही है। आरोप है कि बैंक ऑफ बड़ौदा से जब इस संबंध में पूछा गया तो उनकी ओर से अपने पैनल अधिवक्ता के माध्यम से इन संपत्तियों के संबंध में क्लियरेंस रिपोर्ट प्राप्त करके ऋण जारी करने का दावा किया गया। लेकिन जांच में सामने आया कि बैंक ने राजस्व विभाग से बंधक संपत्तियों के संबंध में कोई जानकारी ही नहीं ली थी।
यदि राजस्व विभाग/नगर निगम से इनके स्वामित्व के संबंध में जानकारी ली गई होती तो सही स्थिति का पता चल पाता। आरोप यह भी है कि शाहिद आलम ने संपत्ति संख्या 91/146 हीरामन का पुरवा पर स्वामित्व अपना दर्शाने के लिए कूटरचित दस्तावेजों का प्रयोग किया।
जांच के बजाए बंद किया ऋण खाता
शत्रु संपत्ति पर ऋण सुविधा प्रदान करने की जानकारी जब प्रभारी अधिकारी शत्रु संपत्ति को हुई तो उन्होंने एक पत्र 20 दिसंबर 2021 को बैंक ऑफ बड़ौदा को लिखा। आरोप है कि जांच या कार्रवाई के स्थान पर बैंक ने 25 अप्रैल 2022 को ऋण खाता ही बंद कर दिया और ऋणी को बंधक संपत्ति के कागजात वापस कर दिए। आरोप है कि इससे स्पष्ट है कि बैंक इस अपराध में पूरी तरह शामिल है।