निदेशक प्रो. अभय करंदीकर ने केंद्र की उपयोगिता और पूरी तरह से संचालित होने की बात को ट्वीट किया है। केंद्र में जियो स्टेशनरी माडलिंग, हाइट रेफरेंस सिस्टम, पोलर मोशन आदि पर काम होगा।
कानपुर आईआईटी अब जमीन के अंदर जल स्रोत, पृथ्वी का आकार, भू-जल की स्थिति, भूकंप, जमीन के अंदर प्लेट्स की हलचल समेत अन्य खगोलीय गतिविधियों की जानकारी और उन पर शोध कर सकेगा।
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गुरुवार को आईआईटी कानपुर में नेशनल सेंटर फॉर जियोडेसी (एनसीजी) का उद्घाटन निदेशक प्रो. अभय करंदीकर ने डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के अधिकारियों संग किया। उन्होंने विभाग से संबंधित वैज्ञानिकों संग बैठक कर शोध व अन्य कार्यों को लेकर समीक्षा की।
यह सेंटर नई टेक्नोलॉजी में एरिया ऑफ मैपिंग, रिमोट सेंसिंग के बारे में जानकारी देगा। यहां कई तरह के उपकरण और टॉवर लगाए गए हैं, जिनसे कई किलोमीटर दूर धरती के अंदर की गतिविधियों का पता चल सकेगा। केंद्र का लोकार्पण जुलाई 2019 में हुआ था।
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कोरोना संक्रमण की वजह से कुछ कार्य रुक गया था। प्रो. ओंकार दीक्षित की देखरेख में प्रो. बी नागराजन व प्रो. बालाजी देवराजू सेंटर में कार्य करेंगे। यह शिक्षा और अनुसंधान गतिविधियों को खोजने वाला देश का पहला केंद्र होगा। निदेशक प्रो. अभय करंदीकर ने केंद्र की उपयोगिता और पूरी तरह से संचालित होने की बात को ट्वीट किया है। केंद्र में जियो स्टेशनरी माडलिंग, हाइट रेफरेंस सिस्टम, पोलर मोशन आदि पर काम होगा।