कानपुर देहात निवासी सीआरपीएफ जवान को अंतिम सलामी देते सेना के जवान। संवाद
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सरवनखेड़ा। पेराजजोर गांव निवासी सीआरपीएफ जवान की बीमारी से छत्तीसगढ़ में मौत हो गई। बुधवार रात उनका शव सरकारी वाहन से गांव लाया गया। गुरुवार सुबह अंतिम दर्शन के लिए जवान के घर के बाहर भीड़ एकत्र हो गई। गार्ड ऑफ ऑनर के बाद शव का अंतिम संस्कार किया। दस वर्षीय बेटे ने मुखाग्नि दी।
पेराजोर गांव के ब्रभुवन सिंह (38) करीब 18 साल पहले सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। वह इस समय छत्तीसगढ़ के रायपुर में तैनात थे। वहां चार दिन पहले अचानक ड्यूटी के दौरान तबियत बिगड़ गई। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। बुधवार को उनकी मौत हो गई।
इसके बाद हेलीकॉप्टर से शव लखनऊ लाया गया। सीआरपीएफ जवान रात में शव गांव लेकर आए। सीआरपीएफ जवान की मौत से परिजनों में कोहराम मच गया। वहीं गुरुवार सुबह जवान के अंतिम दर्शन के लिए ग्रामीणों की भीड़ लगी रही। जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम सलामी दी। इसके बाद परिजन कानपुर ड्योढ़ी घाट शव ले गए। वहां दस वर्षीय बेटे कौशल सिंह ने मुखाग्रि दी।
जन्माष्टमी पर छुट्टी लेकर गांव आया था जवान
ब्रभुवन सिंह चार भाइयों में दूसरे नंबर का था। जवान के बड़े भाई छानू सिंह गांव में रहकर खेती करते हैं। जबकि दो छोटे भाई लालू सिंह व हंशू सिंह सेना में जवान हैं। पिता अर्जुन सिंह सेवानिवृत्त शिक्षक हैं।
ब्रभुवन सिंह जन्माष्टमी के एक सप्ताह पहले छुट्टी लेकर गांव आए थे। जन्माष्टमी के दूसरे दिन वह ड्यूटी पर चले गए थे। उनकी मौत से पत्नी सुनीता देवी बिलखती रही। वह अपने पीछे बेटी गुड़िया (12), बेटा कुशल सिंह (10), व छोटी बेटी रिसा (8) को छोड़ गए हैं। (संवाद)
सीआरपीएफ जवान ब्रभुवन सिंह का फाइल फोटो। संवाद- फोटो : AKBARPUR