कानपुर में बनी आईसक्रीम के स्वाद ने सऊदी अरब और दुबई के भी लोगों को अपना मुरीद बना लिया है। शहर से पहली बार इन देशों को अलग-अलग स्वाद वाली चार सौ किलो आईसक्रीम निर्यात की गई है। खास बात यह है कि एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत इसे भौगोलिक सूचकांक (जीआई टैग) देने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। कमिश्नर ने इस संबंध में जिलाधिकारी को पत्र भी भेजा है।
विदेश व्यापार और निर्यात प्रोत्साहन विभाग ने भी इस पहल की सराहना की है। सिविल लाइंस में रहने वाले आईसक्रीम कारोबारी मानस भगतानी ने बताया कि कुछ महीने पहले सऊदी अरब और दुबई स्थित हॉस्पिटैलिटी कंपनी को अपने उत्पाद के नमूने भेजे थे। कंपनी को उत्पाद पसंद आए थे। इसके बाद मार्च में दिल्ली के एक होटल में बैठक हुई थी। इसमें निर्यात पर सहमति बनी थी। इसके बाद एक अप्रैल को चार सौ किलो आईसक्रीम दिल्ली के जरिये सऊदी अरब भेजी गई थी। इस प्रक्रिया में 32 घंटे लगे।
उन्होंने बताया कि फ्रूट, मलाई और केसर, स्टिक समेत कई स्वाद वाली 15 प्रकार की आइस्क्रीम का कंसाइनमेंट भेजा गया है। उपायुक्त उद्योग सुधीर कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि शहर के लिए यह बड़ी उपलब्धि है। डेयरी उत्पादों की मांग बहुत अच्छी है। वहीं मानस ने बताया कि इन देशों में जिलैटो यानी बिना दूध वाले डेयरी उत्पाद ही उपयोग में आते रहे हैं। पहली बार दूध से बनी आईसक्रीम भेजी गई है।
ऐसे भेजी गई आईसक्रीम
मानस ने बताया कि आईसक्रीम तेजी से पिघलती है। ऐसे में ड्राई आइस पैंकिंग के जरिये भेजी गई है। इसमें तीन दिन तक आईसक्रीम सुरक्षित रहती है। उन्होंने बताया कि दिल्ली से पहले कंपनी ने आधुनिक फ्रीजर भेजा था। इसमें रखकर माल दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा तक गया। इसके बाद प्लेन से सऊदी और दुबई भेजी गई।
शहर में 50 करोड़ से ज्यादा का कारोबार
कानपुर होटल, गेस्ट हाउस, स्वीट्स एंड रेस्टोरेंट के महामंत्री राज कुमार ने बताया कि शहर में पांच बड़े ब्रांडों की आईसक्रीम बिकती है। इसके अलावा 15 से ज्यादा स्थानीय ब्रांड हैं। आईसक्रीम का सालाना 50 करोड़ से ज्यादा का कारोबार है।