रावतपुर रहमत नगर में कुरान पढ़ते रोजेदार।
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कानपुर। रमजान में पढ़ी जाने वाली तरावीह की 20 रकात नमाज इस्लाम के दूसरे खलीफा हजरत उमर फारूख के जमाने से है। इसमें पूरा कुरान पाक सुना जाता है। यह इबादत नफिल इबादत की सुन्नत-ए-मुअक्किदा है इसलिए जान बूझकर तरावीह की नमाज छोड़ना गुनाह है। मजबूरी में मसलन, बुढ़ापे की कमजोरी, मुसाफिर और बीमारी की हालत में इसे छोड़ने की छूट है।
दादामियां चौराहा स्थित मदरसा मजहरुल उलूम मस्जिद निखट्टू शाह के प्रिंसिपल मुफ्ती इकबाल कासमी ने बताया कि पैगंबर-ए-इस्लाम ने तरावीह की बुनियाद डाली थी। उनके पहले की उम्मत में तरावीह नहीं थी। हुजूर पाक ने तीन दिन तरावीह पढ़ी और छोड़ दी। इससे कि यह इबादत फर्ज न हो जाए। हालांकि हजरत उमर फारूख के शासनकाल में तरावीह की नमाज 20 रकात कर दी गई और अब तक पढ़ी जा रही है। इसमें कुरान पाक सुना जाता है। रमजान में पूरे महीने तरावीह पढ़ने का हुक्म है। अगर किसी तरावीह में रमजान के 30 या 29 दिन के पहले कुरान मुकम्मल हो जाता है तो भी पूरे महीने तरावीह सुनी जाती है।
उधर, अहले हदीस विचारधारा के मुसलमान आठ रकात तरावीह की नमाज पढ़ते हैं। उनका मानना है कि तरावीह की नमाज आठ रकात ही होती है। जबकि देवबंदी और बरेलवी मुसलमान 20 रकात नमाज पढ़ते हैं। तरावीह में कुरान सुनाने वाले हाफिज इसके लिए तैयारियां करते हैं और कुरान के पाठ का दोबारा रिवीजन करते हैं।
इबादत कर हासिल करें अल्लाह की रहमत
कानपुर (ब्यूरो)। शहर काजी मौलाना हाफिज अब्दुल कुद्दूस ने तकरीर में कहा कि रमजान को दस-दस दिनों के तीन हिस्सों में बांटा गया है। पहला अशरा रहमत का है। इस अशरे में खूब इबादत कर अल्लाह की रहमतों से मालामाल हो जाएं। खुदा की सबसे ज्यादा रहमतें इस अशरे में बरसती हैं। दूसरा अशरा मगफिरत और तीसरा निजात का अशरा है। इस महीने में एक नफिल का सवाब फर्ज के बराबर और फर्ज का सवाब 70 गुना कर दिया जाता है। मक्का में नमाज पढ़ना एक लाख नमाज पढ़ने के बराबर है। इस महीने लोग उमरा करने सऊदी अरब जाते हैं, क्योंकि इस महीने में एक नमाज का सवाब 70 लाख नमाजों के बराबर है। रोजा और नमाज के बाद इस महीने अधिक से अधिक कुरान की तिलावत करें। अल्लाह को कुरान की तिलावत करने वाले और कुरान पढ़ने और सिखाने वाले बेहद पसंद हैं।