शोध का है पहला चरण
खून में ट्राइग्लिसराइड का बढ़ा होना मोटापा (ओबेसिटी) का भी मार्कर है। इसीलिए आत्महत्या की प्रवृत्ति वाले व्यक्तियों के खानपान पर शोध किया जा रहा है। डॉ.चौधरी की अगुवाई में शोध कर रहे विभाग के सीनियर रेजीडेंट डॉ. अनुपम यादव ने बताया कि यह शोध का पहला चरण है। विषय नया और दिलचस्प है।
लिपि़ड प्रोफाइल का हुआ है अध्ययन
अब तक आत्महत्या का प्रयास करने वाले 12 लोगों के लिपि़ड प्रोफाइल का अध्ययन किया गया। शोध में कुल 30 ऐसी प्रवृत्ति वाले व्यक्ति लिए जाएंगे। शोध में 20 से 40 साल की उम्र के लोगों को शामिल किया जा रहा है। शोध में इन्हीं लोगों के उन 30 परिजनों का भी अध्ययन किया जाएगा।
खानपान की आदतों और मानसिक अवस्था में भी संबंध
शोध के जरिए लोगों की खानपान की आदतों और उसकी मानसिक अवस्था में संबंध तलाशने की कोशिश की जा रही है। देखा जा रहा है कि किस तरह की परिस्थिति में इन्हें अधिक घबराहट होती है। डॉ. यादव ने बताया कि लिपिड प्रोफाइल में कोलेस्ट्राल और दूसरी जांचें भी की गईं।
आत्महत्या के प्रवृत्ति वाले किशोरों पर भी शोध
मनोरोग विभाग और बालरोग विभाग किशोरों पर भी शोध कर रहे हैं। ऐसे बच्चे जो आत्महत्या का प्रयास करते हैं या बात करते हैं। इसमें बालरोग विभाग के वरिष्ठ बालरोग विशेषज्ञ डॉ. यशवंत राव और मनोरोग विभाग के चिकित्सक बच्चों का अध्ययन कर रहे हैं। 12 साल से लेकर 18 साल के लड़के-लड़कियां इसमें शामिल किए जा रहे हैं।