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कानपुर: हॉलमार्क कानून लागू हुआ तो गलाने पड़ेंगे डेढ़ टन सोने के गहने, कारोबारियों को लगेगा 75 करोड़ तक का झटका

Wed, 26 May 2021 03:07 PM IST
शिखा पांडेय अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर

सार

केंद्र सरकार 15 जून से हॉलमार्क कानून लागू करने की तैयारी में है। कोरोना कर्फ्यू के बीच कानपुर के कारोबारियों के सामने स्टाक खत्म करना बड़ी चुनौती है। कानपुर में करीब दो हजार किलो सोने के गहने का स्टॉक होने का अनुमान है। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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हॉलमार्क कानून यदि 15 जून से लागू हुआ तो कानपुर के सराफा कारोबारियों को करीब 1500 किलो (डेढ़ टन) सोने के जेवर गलाने पड़ सकते हैं। इससे उन्हें 75 करोड़ रुपये तक का नुकसान होने का अनुमान है। शहर में करीब 2500 सराफा कारोबारी हैं।
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केवल 40 के पास ही हॉलमार्क संबंधी लाइसेंस है। ऐसे में बिना हॉलमार्क के आभूषणों को इतनी जल्दी खत्म करना बड़ी चुनौती होगी। ऐसे में इन्हें गलाने के अलावा कोई और विकल्प बचेगा नहीं। सोने के आभूषणों पर हॉलमार्क अनिवार्य करने की व्यवस्था एक जनवरी 2021 से प्रस्तावित थी लेकिन सरकार ने इसे छह महीने के लिए बढ़ा दिया था।

फिर एक जून से प्रभावी करने की तैयारी थी, लेकिन सरकार ने सोमवार को 15 जून तक के लिए व्यवस्था बढ़ा दी है। ऐसे में बिना हॉलमार्क आभूषणों के स्टॉक को हटाने का समय बहुत कम मिलने का अनुमान है। मौजूदा समय में कोरोना कर्फ्यू भी चल रहा है। सराफा बाजार बंद है। 
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ऐसे लगेगा झटका
कानपुर में चौक सराफा, नयागंज, बिरहाना रोड थोक और फुटकर आभूषणों का बहुत बड़ा बाजार है। यहां पर पांच बड़े बुलियन कारोबारी हैं। जहां से आभूषण बनाने के लिए कारोबारी सोने की खरीद करते हैं। इन कारोबारियों के पास 2000 किलो सोने के गहनों का स्टॉक होने का अनुमान है। इसमें 1500 किलो के गहने बगैर हॉलमार्क के हैं।

एक तोला सोने की कीमत करीब 50 हजार रुपये है। 1500 किलो गहनों की कीमत करीब साढ़े सात अरब हुई। जब इन्हें गलाया जाएगा तो सोने में लगे रत्नों को अलग-अलग करने, मजदूरी व मेकिंग चार्ज मिलाकर करीब 5-10 फीसदी का नुकसान होगा। ऐसे में 1500 किलो के गहने का स्टॉक खत्म करने में ही 50 से 75 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। 

कानपुर में केवल चार हॉलमार्क सेंटर
बिरहाना रोड में दो, नयागंज और चौक सराफा में एक-एक हॉलमार्क सेंटर हैं, जो बीआईएस (ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्डस) से स्वीकृत हैं। इन सेंटरों को बढ़ाने की मांग कारोबारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि सोने के गहनों की सुरक्षा सबसे अहम है। ऐसे में सरकार इनकी संख्या बढ़वाए। 

सराफा कर रहे 20 कैरेट के हॉलमार्क की मांग
मौजूदा समय में सरकार ने 14, 18 और 22 कैरेट सोने पर हॉलमार्क की व्यवस्था कर रखी है। शहर में 20 कैरेट वाली ज्वैलरी की सबसे अधिक मांग है। ऐसे में सराफा इस कैरेट पर भी हॉलमार्क की व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। जिन सराफा के पास इस कैरेट के आभूषण होंगे, उन्हें हटाने की जरूरत नहीं होगी।

 
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लेकिन 17, 19, 20, 21 कैरेट वाले आभूषणों या बिना हॉलमार्क आभूषणों के स्टाक को क्लीयर करना होगा। हालांकि सरकार अब दो ग्राम से ऊपर के किसी भी कैरेट के सोने के आभूषण पर हॉलमार्क लागू करने की तैयारी में है। 

कोरोना के चलते सराफा बाजार बंद चल रहा है। 15 जून से हॉलमार्क कानून लागू होता है तो स्टाक क्लीयरेंस करने में ही कारोबारियों को करोड़ों का नुकसान होगा। करीब डेढ़ टन सोने के जेवरों को गलाना पड़ेगा।- पंकज अरोड़ा, राष्ट्रीय संयोजक, ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्ड स्मिथ

हॉलमार्क लागू करने में सरकार को बहुत अधिक जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। पहले सराफा की समस्याओं का समाधान किया जाए। हॉलमार्क लागू होने से लोगों को अच्छी क्वालिटी और प्रमाणिक गहने मिल सकेंगे। लेकिन हॉलमार्क सेंटरों की कानपुर समेत पूरे प्रदेश में कमी है।- महेश चंद्र जैन, अध्यक्ष, उप्र सराफा एसोसिएशन

शहर में हॉलमार्किंग सेंटरों की बड़ी कमी है। ज्वैलरी पर यूआईडी का नियम लाना तर्क संगत नहीं है। इससे सराफा की मुश्किलें और बढ़ेंगी। 20 कैरेट की ज्वैलरी पर भी हॉलमार्क की व्यवस्था लागू की जाए।- कैलाश नाथ अग्रवाल, अध्यक्ष, श्री कानपुर सराफा कमेटी, चौक

कोरोना के कारण पिछले दो साल से अक्षय तृतीया का कारोबार हाथ से जा चुका है। लोग अभी भी अपने विश्वसनीय या परिचित सराफा कारोबारियों से ही आभूषण खरीदते हैं। हॉलमार्क लागू होने पर बड़े पैमाने पर बिना हॉलमार्क वाले सोने के गहनों को गलाना होगा। इसमें करीब 50 से 75 करोड़ का नुकसान हो जाएगा।- रामकिशोर मिश्रा, मंत्री, उप्र सराफा एसोसिएशन
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